राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका; 'कमांडर-इन-थीफ' और 'चौकीदार चोर है' मामले में केस रद्द करने की याचिका खारिज

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है. हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 'कमांडर-इन-थीफ' और 'चौकीदार चोर है' जैसी अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर दर्ज आपराधिक मानहानि (Criminal Defamation) मामले और मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। जानिए बॉम्बे हाई कोर्ट के ताजा फैसले, 2018 के इस मानहानि मामले और राहुल गांधी की कानूनी स्थिति से जुड़ी पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Sep 08, 2026 - 12:53
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राहुल गांधी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका; 'कमांडर-इन-थीफ' और 'चौकीदार चोर है' मामले में केस रद्द करने की याचिका खारिज

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित 'चौकीदार चोर है' की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बड़ा झटका लगा है। उनकी इस टिप्पणी पर आपराधिक मानहानि केस रद्द करने से हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। 

इस मामले में राहुल गांधी ने मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से जारी समन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। उनकी ओर से तर्क दिया गया था कि शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। उनकी ओर से कहा गया था कि कथित बयान में किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया था और न ही किसी 'पहचाने जा सकने वाले या निश्चित वर्ग' को निशाना बनाया था।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नितिन बोरकर की सिंगल बेंच ने राहुल गांधी की दलील को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा एक पंजीकृत राष्ट्रीय राजनीतिक दल है और इसलिए वह निश्चित रूप से एक पहचान योग्य संस्था है। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता का दावा है कि वह दो दशक से भाजपा का सक्रिय सदस्य रहा है। पहली नजर में प्रधानमंत्री को, जो भाजपा के सदस्य हैं, 'कमांडर-इन-थीफ' बताने वाले बयान को सिर्फ पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित नहीं माना जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, इस बयान का वास्तविक आशय क्या था और इसका पार्टी के सदस्यों पर क्या प्रभाव पड़ा, यह सवाल मुकदमे के दौरान विचार किया जाना है।

राहुल गांधी के वकील सुदीप पासबोला ने हाईकोर्ट में दलील दी कि कथित ट्वीट में राहुल गांधी ने भाजपा या किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि किसी 'पहचाने जा सकने वाले या निश्चित वर्ग' को निशाना नहीं बनाया गया है। ऐसे में कोई स्पष्ट रूप से पीड़ित व्यक्ति या समूह मौजूद नहीं है, इसलिए शिकायतकर्ता के पास आपराधिक मानहानि का मामला चलाने का अधिकार नहीं है।

राहुल गांधी की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी विरोध किया गया। महाराष्ट्र के एडवोकेट जनरल की ओर से कहा गया कि कोर्ट को यह देखना होगा कि मानहानि के अपराध के लिए जरूरी तत्व मौजूद हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या टिप्पणी किसी निश्चित एवं पहचान योग्य समूह से संबंधित थी।


इनपुट : आईएएनएस

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