US H-1B Visa Rule: एच-1बी वीजा का 60-दिवसीय ग्रेस पीरियड खत्म करने के प्रस्ताव की व्हाइट हाउस समीक्षा पूरी; भारतीय परिवारों पर लटकी तलवार

अमेरिका में नौकरी छूटने के बाद विदेशी कामगारों को मिलने वाले 60 दिनों के 'ग्रेस पीरियड' (Grace Period) को समाप्त करने के प्रस्ताव को व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB/OIRA) ने समीक्षा के बाद मंजूरी दे दी है। जानिए एच-1बी ग्रेस पीरियड विवाद, नियम में बदलाव की प्रक्रिया और भारतीय आईटी कम्युनिटी पर इसके प्रभाव से जुड़ी पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Aug 29, 2026 - 11:26
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 US H-1B Visa Rule: एच-1बी वीजा का 60-दिवसीय ग्रेस पीरियड खत्म करने के प्रस्ताव की व्हाइट हाउस समीक्षा पूरी; भारतीय परिवारों पर लटकी तलवार
US Completes Review To End H-1B 60-Day Grace Period: Impact On Indians

वॉशिंगटन। ट्रंप प्रशासन ने H-1B और दूसरे विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए नौकरी खत्म होने के बाद मिलने वाले 60 दिन के 'ग्रेस पीरियड' (छूट की अवधि) को खत्म करने के प्रस्ताव की समीक्षा पूरी कर ली है। इससे हजारों भारतीय कर्मचारियों और उनके परिवारों पर असर पड़ सकता है।

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के "60-दिन की वैकल्पिक रियायती अवधि को खत्म करना" का प्रस्ताव 6 अगस्त को व्हाइट हाउस के सूचना और नियामक मामलों के कार्यालय को सौंपा गया था।

आधिकारिक रेगुलेटरी रिकॉर्ड के अनुसार, 27 अगस्त को समीक्षा पूरी हुई और इसे "बदलाव के साथ सहमत के तौर पर दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि प्रस्ताव में कुछ बदलावों के साथ व्हाइट हाउस की समीक्षा प्रक्रिया पूरी हो गई है।

यह प्रस्ताव अभी पब्लिश नहीं किया गया है और इसकी पूरी शर्तें अभी उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए, अभी 60 दिन की सुरक्षा वाली मौजूदा व्यवस्था लागू रहेगी।

अगला कदम आम तौर पर प्रस्तावित नियम को 'फेडरल रजिस्टर' में पब्लिश करना होगा, जिसके बाद लोगों की राय जानने के लिए एक समय-सीमा तय की जाएगी। इसके बाद, किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले डीएचएस को लोगों की राय पर विचार करना होगा और अंतिम नियम जारी करना होगा।

इस प्रस्ताव का रेगुलेटरी इंफॉर्मेशन नंबर 1615-एडी 22 है और इसे अमेरिकी सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज तैयार कर रहा है। रेगुलेटरी रिकॉर्ड में इसे एक ऐसे प्रस्तावित नियम के तौर पर बताया गया है जो आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण नहीं है और जिसके लिए कोई कानूनी समय-सीमा तय नहीं है।

मौजूदा नियमों के तहत योग्य कर्मचारियों को नौकरी खत्म होने के बाद लगातार 60 दिनों तक या उनके अधिकृत प्रवास की अवधि खत्म होने तक रहने की अनुमति मिल सकती है।

इस समय-सीमा के दौरान प्रभावित कर्मचारी कोई दूसरा ऐसा नियोक्ता ढूंढ सकते हैं, जो उन्हें स्पॉन्सर करने को तैयार हो, अपने इमिग्रेशन स्टेटस में बदलाव की कोशिश कर सकते हैं या अमेरिका छोड़ने की तैयारी कर सकते हैं। इसमें एच-1बी, एल-1, ओ-1 और कई अन्य अस्थायी रोजगार वीजा वाले लोग शामिल हैं।

भारतीय नागरिक, जो एच-1बी वीजा पाने वालों का सबसे बड़ा समूह हैं। अगर प्रशासन इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ता है तो भारतीय नागरिक को खास तौर पर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।

एशियाई अमेरिकियों, मूल हवाईवासियों और प्रशांत द्वीपवासियों पर राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग के पूर्व सदस्य अजय जैन भुटोरिया ने प्रस्तावित बदलाव की निंदा की और कहा कि मौजूदा ग्रेस पीरियड को खत्म करने के बजाय बढ़ाया जाना चाहिए।

भुटोरिया ने कहा, "मैं डीएचएस की इस प्रस्तावित नीति की कड़ी निंदा करता हूं और इसे गलत बताता हूं। 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म करना अमानवीय और अव्यावहारिक है। जब किसी उच्च-कुशल कर्मचारी की नौकरी अचानक चली जाती है, तो 60 दिन का समय पहले से ही बहुत कम होता है। इस सुरक्षा को पूरी तरह से खत्म करने से कानून का पालन करने वाले हजारों लोगों के पास बिल्कुल भी समय नहीं बचेगा।"

उन्होंने चेतावनी दी कि अचानक नौकरी जाने के बाद प्रभावित परिवारों के पास अपना घर, बच्चों की शिक्षा और अन्य व्यक्तिगत मामलों को संभालने के लिए पर्याप्त समय नहीं हो सकता है।

भुटोरिया ने कहा कि उन्होंने 2023 में व्हाइट हाउस एडवाइजरी कमीशन से ग्रेस पीरियड को 60 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने की सिफारिश के लिए सर्वसम्मति से समर्थन हासिल किया था।

उन्होंने तर्क दिया कि टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और इंजीनियरिंग में भर्ती प्रक्रिया में अक्सर कई इंटरव्यू होते हैं, और उसके बाद कर्मचारी का स्टेटस नए एम्प्लॉयर के पास ट्रांसफर करने के लिए इमिग्रेशन से जुड़े कागजी काम करने पड़ते हैं।

भुटोरिया ने कहा, "नौकरी से निकाले गए एच-1बी कर्मचारियों के लिए 60 दिन के ग्रेस पीरियड को खत्म करना पीछे की ओर एक बड़ा कदम है। जब मैंने मार्च 2023 में व्हाइट हाउस एएएनएचपीआई कमीशन के सामने इस समय-सीमा को 180 दिन तक बढ़ाने की सिफारिश रखी थी, तो वह कॉर्पोरेट हायरिंग की असलियत पर आधारित थी, जहां कई चरणों वाले इंटरव्यू और वीजा ट्रांसफर के कागजी काम पूरे होने में महीनों लग जाते हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "इस समय-सीमा को पूरी तरह खत्म करने से कुशल भारतीय प्रोफेशनल्स और उनके परिवारों को रातों-रात देश छोड़ना पड़ सकता है। मैं पूरे अमेरिका में कम्युनिटी संगठनों और बिजनेस लीडर्स से अपील करता हूं कि वे एकजुट हों और जैसे ही यह नियम फेडरल रजिस्टर में आए, इसके खिलाफ अपनी राय (पब्लिक कमेंट्स) दर्ज कराएं।"

60 दिन का नियम जनवरी 2017 में लागू हुआ था। यह नियम अधिक कुशल अप्रवासी और गैर-अप्रवासी कर्मचारियों से जुड़े बड़े नियमों का हिस्सा था। यह नियम हर मंजूर वैलिडिटी पीरियड के दौरान एक बार ग्रेस पीरियड की इजाजत देता है, लेकिन इमिग्रेशन अधिकारियों को यह अधिकार भी देता है कि वे अपनी मर्जी से इसे कम कर सकें या इसे देने से मना कर सकें।

एच-1बी प्रोग्राम अमेरिकी कंपनियों को ऐसे विदेशी प्रोफेशनल्स को काम पर रखने की इजाजत देता है, जिनके पास खास कामों के लिए एडवांस्ड जानकारी हो। टेक्नोलॉजी कंपनियां इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल करती हैं और मंजूर हुए एच-1बी बेनिफिशियरीज में भारतीय नागरिकों की संख्या हमेशा से काफी ज्यादा रही है।

इनपुट : आईएएनएस

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