जुराला बांध से पानी छोड़ना किसानों के संघर्ष और दबाव की जीत; तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव का रेवंत सरकार पर हमला
तेलंगाना भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने महबूबनगर और जोगुलम्बा गडवाल क्षेत्र में जुराला (प्रियदर्शिनी) परियोजना से सिंचाई के लिए पानी छोड़े जाने के फैसले को किसानों के अनवरत संघर्ष और विपक्ष के दबाव की बड़ी जीत करार दिया है। जानिए जुराला बांध जल विवाद, किसानों के आंदोलन और भाजपा के राजनीतिक हमलों पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
हैदराबाद: तेलंगाना में जुराला सिंचाई परियोजना (प्रियदर्शिनी जुराला प्रोजेक्ट) से नहरों में पानी छोड़े जाने को लेकर गरमाई सियासत के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने इसे राज्य के किसानों के कड़े संघर्ष और विपक्ष के निरंतर दबाव की बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार किसानों की अनदेखी कर रही थी, लेकिन जनता के आक्रोश और भाजपा के कड़े विरोध के कारण सरकार को मजबूर होकर पानी छोड़ना पड़ा।
हाल ही में जुराला परियोजना की ओर जाते समय जडचेरला में पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के घटनाक्रम के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने राज्य सरकार की नीतियों और नेशनल हेराल्ड मामले पर कांग्रेस नेतृत्व को जमकर आड़े हाथों लिया।
'किसानों के आगे झुकी अहंकारी सरकार': रामचंद्र राव
रामचंद्र राव ने कहा कि महबूबनगर, जोगुलम्बा गडवाल और वनपर्थी जिलों के किसान पिछले कई दिनों से अपनी सूखती फसलों को बचाने के लिए पानी की मांग को लेकर आंदोलनरत थे:
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किसानों का दबाव काम आया: लगभग साढ़े तीन महीने पहले बोई गई धान की फसलें पानी की कमी से बर्बाद होने की कगार पर थीं। किसानों ने नहरों के रेगुलेटर तक खोलने की कोशिश की थी। भाजपा ने किसानों की इस जायज मांग को मजबूती से उठाया, जिसके दबाव में आकर प्रशासन को पानी की आपूर्ति बहाल करने का निर्णय लेना पड़ा।
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दमनकारी नीति की निंदा: उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा प्रतिनिधिमंडल किसानों का दर्द सुनने और जमीनी हकीकत जानने जुराला जा रहा था, तब पुलिस बल का इस्तेमाल कर नेताओं को गिरफ्तार और नजरबंद किया गया। राव ने कहा कि यह सरकार लोकतंत्र की हत्या कर रही है और इसका रवैया किसानों के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है।
जुराला बांध विवाद की मुख्य वजहें
| पहलू | किसानों व विपक्ष का पक्ष | राज्य सरकार का तर्क |
| पानी की उपलब्धता | जलाशय में पर्याप्त पानी होने के बावजूद नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा था। | ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से कम आवक के कारण केवल पेयजल हेतु पानी सुरक्षित रखना प्राथमिकता थी। |
| फसलों का संकट | पानी न मिलने से हजारों एकड़ में धान की खड़ी फसल नष्ट होने की कगार पर थी। | गाद (Silt) जमने से भंडारण क्षमता घटी और अल नीनो/कम बारिश ने हालात जटिल किए। |
| विरोध का तरीका | किसानों और विपक्षी दलों ने सड़कों पर उतरकर व्यापक प्रदर्शन किया। | कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन नेताओं को हिरासत में लिया गया। |
नेशनल हेराल्ड केस पर कांग्रेस को घेरा
प्रेस से बातचीत के दौरान रामचंद्र राव ने नेशनल हेराल्ड और कांग्रेस के वित्तीय प्रबंधन पर भी तीखा प्रहार किया:
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प्राथमिकताओं पर सवाल: भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि तेलंगाना की कांग्रेस सरकार के पास चुनावी गारंटियों, किसानों की आर्थिक मदद और विकास कार्यों के लिए फंड की कमी का रोना रोया जाता है, लेकिन नेशनल हेराल्ड जैसे मामलों में कानूनी लड़ाइयों और केंद्रीय नेतृत्व के बचाव के लिए संसाधन झोंके जा रहे हैं।
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जवाबदेही से भागने का आरोप: उन्होंने कहा कि जब भी अदालत या जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में पूछताछ करती हैं, तो कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताने लगती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में कानून का राज है और भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही तय होकर रहेगी।
रामचंद्र राव ने दोहराया कि पानी छोड़े जाने के बाद भी भाजपा किसानों के मुद्दों पर अपनी निगरानी जारी रखेगी ताकि अंतिम छोर (टेलरियों) तक किसानों के खेतों को पूरा पानी मिल सके।
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