यूट्यूब पर मोनेटाइजेशन की शर्तें सख्त होने के बीच चीनी प्लेटफॉर्म 'Bilibili' पर शिफ्ट हो रहे भारतीय क्रिएटर्स

यूट्यूब द्वारा नए क्रिएटर्स के लिए मोनेटाइजेशन नियमों को कड़ा किए जाने और भारत-चीन राजनयिक संबंधों में आई नरमी के बीच भारतीय डिजिटल क्रिएटर्स ने एक नया ठिकाना ढूंढ लिया है। भारत में अभी आधिकारिक रूप से लॉन्च भी नहीं हुए चीनी वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म 'बिलिबिलि' (Bilibili), जिसे 'चीन का यूट्यूब' भी कहा जाता है, पर बड़ी संख्या में भारतीय क्रिएटर्स जुड़ रहे हैं। जानिए भारतीय क्रिएटर्स के बिलिबिलि की ओर बढ़ते रुझान और इसके नफा-नुकसान पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Sep 22, 2026 - 14:08
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यूट्यूब पर मोनेटाइजेशन की शर्तें सख्त होने के बीच चीनी प्लेटफॉर्म 'Bilibili' पर शिफ्ट हो रहे भारतीय क्रिएटर्स

नई दिल्ली: वैश्विक डिजिटल क्रिएटर इकोनॉमी में एक अप्रत्याशित और बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यूट्यूब (YouTube) द्वारा नए कंटेंट क्रिएटर्स के लिए मोनेटाइजेशन के नियम कड़े किए जाने के बाद भारतीय डिजिटल क्रिएटर्स अब चीन के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म 'बिलिबिलि' (Bilibili) का रुख कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि बिलिबिलि ने अभी तक भारत में आधिकारिक तौर पर अपनी सेवाएं भी शुरू नहीं की हैं।

भारतीय क्रिएटर्स वीपीएन (VPN), एपीके फाइल्स और विदेशी लोकेशन सेटिंग्स जैसी तकनीकी तरकीबों (Workarounds) का इस्तेमाल करके बिलिबिलि पर अकाउंट बना रहे हैं और चीनी ऑडियंस के बीच तेजी से व्यूज और फॉलोअर्स बटोर रहे हैं।

यूट्यूब की सख्ती बनी पलायन की मुख्य वजह

क्रिएटर्स के इस कदम के पीछे गूगल के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म यूट्यूब की आगामी सख्त नीतियां हैं:

  • दोगुनी हुई मोनेटाइजेशन की पात्रता: यूट्यूब के नए नियमों के तहत 1 फरवरी 2027 से यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YPP) में शामिल होने के लिए आवश्यक वॉच ऑवर्स को 4,000 से बढ़ाकर 8,000 घंटे और शॉर्ट्स व्यूज को 10 मिलियन से बढ़ाकर 20 मिलियन व्यूज किया जा रहा है।

  • छोटे क्रिएटर्स की मुश्किलें: हालांकि पुराने क्रिएटर्स पर इसका असर नहीं पड़ेगा, लेकिन नए और उभरते क्रिएटर्स के लिए यूट्यूब से कमाई शुरू करने का रास्ता लगभग दोगुना कठिन हो गया है।

  • अल्टरनेटिव प्लेटफॉर्म की तलाश: इस सख्त बाधा के चलते क्रिएटर्स अपने कंटेंट के लिए अन्य विकल्प तलाश रहे हैं, ताकि वे किसी एक प्लेटफॉर्म पर निर्भर न रहें।

क्रिएटर्स को क्यों लुभा रहा है 'बिलिबिलि'?

पैमाना यूट्यूब (YouTube) बिलिबिलि (Bilibili)
एंट्री बैरियर 1,000 सब्सक्राइबर्स + 8,000 घंटे या 20M शॉर्ट्स व्यूज (2027 से) 1,000 फॉलोअर्स या केवल 1 लाख कुल वीडियो व्यूज
पेआउट मॉडल विज्ञापन रेवेन्यू शेयरिंग (CPM/RPM) क्रिएटर इंसेंटिव (करीब ₹60 प्रति 1,000 व्यूज) + वर्चुअल गिफ्ट्स
ऑडियंस साइज वैश्विक, पर अत्यधिक संतृप्त (Saturated) चीन का विशाल युवा वर्ग (गेमिंग, एनीमे, टेक में रुचि)
भारत में स्थिति पूर्णतः स्थापित एवं स्थानीयकृत अनौपचारिक (VPN और ग्लोबल ऐप के जरिए)
  • कम कंपटीशन और तेजी से ग्रोथ: रिपोर्ट के अनुसार, भारत से जुड़े यात्रा (Travel), लाइफस्टाइल, टेक गैजेट्स और शिक्षा से जुड़े वीडियो चीनी सबटाइटल्स के साथ बिलिबिलि पर काफी वायरल हो रहे हैं। कुछ भारतीय क्रिएटर्स ने चंद हफ्तों में ही हजारों व्यूज और सैकड़ों ऑर्गेनिक फॉलोअर्स हासिल कर लिए हैं।

  • क्रिएटर फ्रेंडली इंसेंटिव: बिलिबिलि का स्टूडियो मॉडल केवल विज्ञापनों पर निर्भर रहने के बजाय इंगेजमेंट, शेयर्स और वर्चुअल गिफ्टिंग ('बैटरी' टिपिंग) पर कमाई का अवसर देता है।

नियामक, बैंकिंग और डेटा सुरक्षा पर बड़ी चिंताएं

यद्यपि क्रिएटर्स के लिए यह एक आकर्षक कमाई का जरिया बन रहा है, लेकिन बैंकिंग और वित्तीय सेवा (BFSI) विशेषज्ञों ने इसके साथ जुड़े जोखिमों पर चेतावनी जारी की है:

  1. फेमा (FEMA) उल्लंघन का खतरा: भारत में अनधिकृत प्लेटफॉर्म पर वीपीएन के जरिए कमाई करने और अनौपचारिक चैनल्स से विदेशी मुद्रा प्राप्त करने से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फेमा नियमों के उल्लंघन का जोखिम पैदा होता है।

  2. पेमेंट गेटवे की समस्या: बिलिबिलि का कोई स्थानीय भारतीय बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। ऐसे में ऑथराइज्ड डीलर (AD) बैंकों के जरिए फंड्स का भारत में रेमिटेंस ट्रैक करना जटिल हो सकता है।

  3. डेटा सुरक्षा और साइबर जोखिम: भारत सरकार पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के आधार पर कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगा चुकी है। ऐसे में बिना भारत-विशिष्ट डेटा स्थानीयकरण (Data Localization) के चीनी सर्वरों पर कंटेंट और व्यक्तिगत विवरण साझा करना भविष्य में कानूनी अड़चनों को न्योता दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिलिबिलि फिलहाल यूट्यूब का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकता, लेकिन यदि भविष्य में यह मंच आधिकारिक रूप से भारतीय पेमेंट सपोर्ट और स्थानीय भाषा विकल्पों के साथ आता है, तो यह भारतीय क्रिएटर इकोसिस्टम में एक नई जंग छेड़ सकता है।

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