भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के संदेश की जमकर की सराहना; बोले- 'वैश्विक शांति और सांस्कृतिक एकता की दिशा में मील का पत्थर'

संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के संबोधन के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय के शीर्ष नेताओं, कॉरपोरेट हस्तियों, सामुदायिक समन्वयकों और शिक्षाविदों ने उनके विचारों और संदेश की खुले दिल से सराहना की है। प्रवासी नेताओं ने कहा कि डॉ. भागवत द्वारा प्रस्तुत 'वसुधैव कुटुंबकम' (विश्व एक परिवार है), सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव और निस्वार्थ समाज सेवा का विचार आज के वैश्विक परिवेश में अत्यंत प्रासंगिक और प्रेरणादायक है।

Aug 29, 2026 - 11:27
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भारतीय-अमेरिकी नेताओं ने संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के संदेश की जमकर की सराहना; बोले- 'वैश्विक शांति और सांस्कृतिक एकता की दिशा में मील का पत्थर'

न्यूयॉर्क। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के नेताओं ने साझा मानवता, जमीनी नेतृत्व और परिवार, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण के प्रति प्रवासी भारतीयों की जिम्मेदारी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के संदेश की प्रशंसा की।

संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ धार्मिक नेताओं की बैठक में शामिल होने पर श्रोताओं ने कहा कि भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काम को बहुत आसान शब्दों में समझाया। उन्होंने सांस्कृतिक और भाषाई मतभेदों के बावजूद समुदायों से स्थानीय क्षमता निर्माण व मिलकर काम करने के उनके आह्वान पर बात की।

अमेरिकन इंडिया पब्लिक अफेयर्स कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सेहवानी ने इस संबोधन को अमेरिका में अपने लगभग चार दशकों के जीवन का सबसे यादगार क्षण बताया। सेहवानी ने कहा, "आज मेरे जीवन का सबसे यादगार दिन है। मैं लगभग 40 साल से यहां हूं और मैंने दुनियाभर के तमाम नेताओं को सुना है।"

सेहवानी ने कहा कि मोहन भागवत ने भारत, सनातन परंपराओं, हिंदुत्व और भारतीय प्रवासियों द्वारा अमेरिका में दिए जा सकने वाले योगदान के बारे में बात की। उन्होंने कहा, "भारतीय प्रवासी यहां क्या कर सकते हैं, बहुत ही सरल शब्दों में, बहुत ही अद्भुत तरीके से बताया। मेरे पास इसे बयां करने के लिए शब्द ही नहीं हैं।"

सेवहानी ने कहा कि कार्यक्रम में आए मेहमान भी संबोधन के सार से प्रभावित हुए। उन्होंने स्थिरता, पारिवारिक जीवन और व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर संघ प्रमुख की चर्चा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "ये छोटी-छोटी बातें हैं, लेकिन इनका बहुत महत्व है।"

सेहवानी ने कहा कि भागवत ने उन श्रोताओं के लिए भी संघ का स्पष्ट वर्णन किया, जो संगठन के बारे में बहुत कम जानते थे। सेहवानी ने कहा, "उन्होंने आसान शब्दों में कहा कि संघ कार्यकर्ताओं को तैयार करता है और फिर आगे क्या करना है, यह कार्यकर्ताओं पर निर्भर करता है।"

'सेवा बे एरिया' चैप्टर के अध्यक्ष और स्टैनफोर्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर अनुराग मैराल ने कहा कि मोहन भागवत ने जिस तरह से समझाया कि संघ कैसे स्वयंसेवक तैयार करता है, वह उन्हें बहुत पसंद आया। मैराल ने कहा, "वे कह रहे थे कि संघ लोगों को तैयार करने पर ध्यान देता है। जो लोग प्रशिक्षित होते हैं और स्वयंसेवक बनते हैं, वे आगे चलकर कई तरह के काम करते हैं।"

मैराल ने स्वास्थ्य असमानता, शिक्षा में समानता और भोजन की कमी जैसे क्षेत्रों में 'सेवा' के स्वयंसेवकों की ओर से किए गए कामों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "वे लोगों को तैयार करते हैं और असल में लोग ही काम करते हैं।"

उन्होंने कहा कि मानवता की समानता के बारे में भागवत का संदेश भारतीय समुदाय से कहीं आगे तक अहमियत रखता है। मैरल ने कहा, "हमारी संस्कृति अलग हो सकती है, हमारी भाषाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हम एक ही लोग हैं। जब तक हम साथ नहीं आते, हम अपने समाज में दिखने वाली कई चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते।"

मैराल ने समुदायों को अपनी समस्याओं का समाधान खुद करने के लिए सशक्त बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "आप स्थानीय स्तर पर समस्याओं को हल करने के लिए स्थानीय क्षमता कैसे बनाते हैं? यह वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि 'ऊपर से नीचे' वाला तरीका हमेशा काम नहीं करता।"

सेवा इंटरनेशनल की पब्लिक अफेयर्स की उपाध्यक्ष और कैलिफोर्निया की अटॉर्नी राखी इसरानी ने कहा कि भाषण में युवा पीढ़ी तक सांस्कृतिक ज्ञान पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा, "यह हमारा फर्ज है कि हम अपने बच्चों के साथ समय बिताएं, ताकि वे भी अपनी अहमियत को समझ सकें।"

एक डॉक्टर और लंबे समय से आरएसएस के कार्यकर्ता रहे नरसिम्हम देशिका ने कहा कि परिवार, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण के प्रति दायित्वों के बारे में भागवत की बातें भाषण के सबसे मजबूत हिस्सों में से थीं।


इनपुट : आईएएनएस

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