भारत को लेकर बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय विश्वास, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास क्षमता बना रही निवेशकों की पसंद: वैश्विक विशेषज्ञ

Oct 04, 2026 - 16:34
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भारत को लेकर बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय विश्वास, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास क्षमता बना रही निवेशकों की पसंद: वैश्विक विशेषज्ञ
India robust infrastructure and development potential are making it a preferred choice for investors Global experts

नई दिल्ली । कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में दुनिया भर से आए अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने रविवार को वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक चुनौतियों के बीच देशों की आर्थिक मजबूती बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। सम्मेलन में भारत की विकास संभावनाओं, वैश्विक व्यापार व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु जोखिमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। 

भारत को लेकर बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय विश्वास

स्वीडिश अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वह इस सम्मेलन से इसकी शुरुआत से जुड़े रहे हैं और समय के साथ इसकी गुणवत्ता तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि इस बार पहले की तुलना में कहीं अधिक देशों और प्रतिनिधियों की भागीदारी देखने को मिल रही है।उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां अत्यधिक अनिश्चित हैं और इसी संदर्भ में सम्मेलन की चर्चाएं महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, व्यापार और आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े जोखिमों के बीच अर्थव्यवस्थाओं को अधिक लचीला और सक्षम बनाने पर विचार-विमर्श समय की जरूरत है।

भारत की मजबूत विकास दर

एरिक बर्गलोफ ने आईएएनएस से कहा, "भारत की विकास संभावनाएं मजबूत हैं और कोविड-19 के बाद देश ने प्रभावशाली आर्थिक गति हासिल की है।"उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि की क्षमता बनी हुई है। हालांकि उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है।उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने आम लोगों और कारोबारों को राहत देने के प्रयास किए हैं, लेकिन इससे राजकोषीय दबाव भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों के बीच विकास गति बनाए रखना नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

इसके अलावा, ब्राजील स्थित क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव के कार्यकारी निदेशक जुलियानो असुन्साओ ने आईएएनएस से कहा कि आज दुनिया जिस सबसे बड़े साझा जोखिम का सामना कर रही है, वह जलवायु परिवर्तन है।

नीति निर्माताओं के सामने चुनौती

उन्होंने कहा, "जलवायु संकट किसी एक देश का मुद्दा नहीं है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी होगा। भारत और ब्राजील न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर रहे हैं, बल्कि समाधान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।"जुलियानो असुन्साओ ने आगे कहा कि भारत और ब्राजील के बीच ब्रिक्स जैसे मंचों के माध्यम से पहले से कई संस्थागत संबंध मौजूद हैं। इसके अलावा भारतीय कंपनियों का ब्राजील में निवेश भी बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सामने विकास, जलवायु, कृषि और सतत आर्थिक वृद्धि जैसी कई समान चुनौतियां हैं।

यही वजह है कि दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं और अधिक मजबूत हो सकती हैं।वहीं, न्यूजीलैंड के अर्थशास्त्री प्रो. जॉन गिब्सन ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। उन्होंने कहा कि यहां केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो रही है।

 एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) के एरिक बर्गलोफ का बड़ा बयान

उन्होंने कहा कि दुनिया में बढ़ती अनिश्चितता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नियम-आधारित और अधिक व्यवस्थित आर्थिक सहयोग का उदाहरण है।इसके साथ ही, जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकॉनॉमिक्स के निदेशक काजुतो सुजुकी ने आईएएनएस से कहा कि आज के दौर में अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति और जियोइकॉनॉमिक्स एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव की विशेषता यही है कि यह केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उन भू-राजनीतिक कारकों पर भी चर्चा करता है जो आर्थिक फैसलों को प्रभावित करते हैं।काजुतो सुजुकी ने कहा कि चीन के साथ जटिल संबंधों के चलते जापानी उद्योग लंबे समय से भारत को एक महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरे बाजार के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां भारत में निवेश अवसर तलाश रही हैं और देश को दीर्घकालिक विकास एवं विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही हैं। उन्होंने बताया कि भारत की बाजार क्षमता, जनसांख्यिकीय ताकत और आर्थिक विस्तार की संभावनाएं विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।

इनपुट : आईएएनएस

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