धर्मा प्रोडक्शंस ने जीता ₹12.11 करोड़ का जीएसटी केस; बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज किया टैक्स विभाग का तर्क

फिल्म निर्माता करण जौहर की कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस (Dharma Productions) को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी और वित्तीय राहत मिली है। अदालत ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग द्वारा जारी ₹12.11 करोड़ के टैक्स मांग और कारण बताओ नोटिस को पूरी तरह रद्द कर दिया है। टैक्स विभाग का तर्क था कि फिल्मों के सैटेलाइट और डिजिटल प्रसारण अधिकारों का हस्तांतरण (Copyright Transfer) 'सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर' (IT Software) की अस्थायी या स्थायी अनुमति के समान है और इस पर 18% की दर से जीएसटी लगना चाहिए। जानिए बॉम्बे हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले, कॉपीराइट कानून के प्रावधानों और फिल्म उद्योग पर इसके दूरगामी असर की पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Sep 23, 2026 - 11:45
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धर्मा प्रोडक्शंस ने जीता ₹12.11 करोड़ का जीएसटी केस; बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज किया टैक्स विभाग का तर्क

मुंबई: मशहूर फिल्म निर्माता करण जौहर के स्वामित्व वाली प्रमुख प्रोडक्शन कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड (Dharma Productions) को बॉम्बे हाईकोर्ट से एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित कानूनी मामले में बड़ी राहत मिली है। अदालत ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) विभाग द्वारा कंपनी के खिलाफ जारी किए गए ₹12.11 करोड़ के टैक्स नोटिस और मांग आदेश को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में टैक्स अधिकारियों की उस दलील को पूरी तरह अनुचित ठहराया, जिसमें उन्होंने फिल्मों के प्रसारण अधिकारों (कॉपीराइट) को 'सूचना प्रौद्योगिकी सॉफ्टवेयर' (Information Technology Software) की श्रेणी में शामिल करने की कोशिश की थी।

क्या था पूरा विवाद और टैक्स विभाग का दावा?

यह मामला धर्मा प्रोडक्शंस द्वारा अपनी फिल्मों के सैटेलाइट टेलीविजन, डिजिटल स्ट्रीमिंग और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स को दिए गए कॉपीराइट और लाइसेंसिंग अधिकारों से जुड़ा हुआ था:

  • टैक्स विभाग की अजीबोगरीब दलील: सीजीएसटी (CGST) विभाग के अधिकारियों ने दावा किया था कि डिजिटल फाइल्स और प्रसारण मीडिया में वितरित किए जाने वाले फिल्म कॉपीराइट को 'आईटी सॉफ्टवेयर के उपयोग की अनुमति' (Temporary or Permanent Transfer of IT Software) माना जाना चाहिए।

  • 18% टैक्स की मांग: इस वर्गीकरण के आधार पर विभाग ने कंपनी पर 18 प्रतिशत की उच्च दर से जीएसटी लगाते हुए ब्याज और जुर्माने सहित कुल ₹12.11 करोड़ की अतिरिक्त देनदारी का नोटिस जारी किया था।

  • धर्मा प्रोडक्शंस का रुख: धर्मा प्रोडक्शंस ने इस नोटिस को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने दलील दी कि 'सिनेमैटोग्राफ फिल्म' का कॉपीराइट, कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत एक स्वतंत्र और विशिष्ट अधिकार है, जिसे कंप्यूटर प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर कोडिंग के साथ मिलाया नहीं जा सकता।

बॉम्बे हाईकोर्ट का कड़ा रुख और फैसला

जस्टिस के. आर. श्रीराम और जस्टिस जीतेंद्र जैन की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए टैक्स अधिकारियों की व्याख्या को कानूनन गलत करार दिया:

  • फिल्म कॉपीराइट ≠ आईटी सॉफ्टवेयर: पीठ ने स्पष्ट किया कि भारतीय कॉपीराइट अधिनियम और सीमा शुल्क टैरिफ/जीएसटी वर्गीकरण कोड में सिनेमैटोग्राफ कार्यों और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की परिभाषाएं पूरी तरह अलग और स्पष्ट हैं। केवल इसलिए कि कोई फिल्म डिजिटल माध्यम से स्थानांतरित या प्रदर्शित की जा रही है, वह सॉफ्टवेयर नहीं बन जाती।

  • अधिकार क्षेत्र से बाहर का आदेश: अदालत ने माना कि कर विभाग ने नियमों की मनमानी व्याख्या करके कंपनी पर अनुचित कर थोपने का प्रयास किया। इसके साथ ही अदालत ने जारी किए गए मांग आदेश और सभी संबंधित कार्यवाही को निरस्त कर दिया।

विवाद का तुलनात्मक विश्लेषण

कानूनी पहलू जीएसटी विभाग का दावा बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
वर्गीकरण फिल्म वितरण राइट्स को आईटी सॉफ्टवेयर/कोडिंग का हस्तांतरण माना जाए। सिनेमैटोग्राफ फिल्म का कॉपीराइट पूरी तरह स्वतंत्र बौद्धिक संपदा है, सॉफ्टवेयर नहीं।
लागू टैक्स दर सॉफ्टवेयर ट्रांसफर की श्रेणी में 18% की मांग। सॉफ्टवेयर से जुड़े उच्च कर स्लैब को फिल्म कॉपीराइट पर थोपना असंवैधानिक व अवैध।
परिणाम ₹12.11 करोड़ की टैक्स और पेनल्टी मांग। मांग नोटिस पूरी तरह रद्द, प्रोडक्शन हाउस को संपूर्ण वित्तीय राहत।

भारतीय फिल्म उद्योग के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

कानूनी विशेषज्ञों और फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि बॉम्बे हाईकोर्ट का यह निर्णय समूचे भारतीय मनोरंजन और मीडिया उद्योग के लिए एक बड़ा नजीर (Precedent) साबित होगा:

  1. स्पष्टता और सुरक्षा: वर्तमान दौर में जब सिनेमाघरों के अलावा ओटीटी (OTT) और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फिल्मों के राइट्स करोड़ों में बेचे जाते हैं, तब इस फैसले से अन्य प्रोडक्शन हाउसों (जैसे यशराज फिल्म्स, टी-सीरीज, आदि) को टैक्स अधिकारियों द्वारा मनमाने वर्गीकरण और मुकदमेबाजी से सुरक्षा मिलेगी।

  2. दोहरे कराधान से बचाव: यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि बौद्धिक संपदा (IP Rights) के वैध हस्तांतरण पर केवल प्रासंगिक और उचित श्रेणियों के तहत ही कर लगाया जाए।

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