रोशिबिना देवी ने रचा इतिहास; वुशु के 60 किग्रा सांडा स्पर्धा में भारत को दिलाया शानदार सिल्वर मेडल

एशियन गेम्स में भारत की स्टार वुशु खिलाड़ी नाओरेम रोशिबिना देवी ने इतिहास रचते हुए महिलाओं के 60 किग्रा सांडा (Sanda) स्पर्धा में रजत पदक (Silver Medal) अपने नाम कर लिया है। स्वर्ण पदक के लिए हुए कांटे की टक्कर वाले फाइनल मुकाबले में मणिपुर की इस प्रतिभाशाली एथलीट ने स्थानीय चीनी खिलाड़ी को कड़ी चुनौती दी, हालांकि अंकों के मामूली अंतर से उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। जानिए रोशिबिना देवी के फाइनल मुकाबले, उनके खेल सफर और भारत के वुशु अभियान पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

Sep 24, 2026 - 11:44
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रोशिबिना देवी ने रचा इतिहास; वुशु के 60 किग्रा सांडा स्पर्धा में भारत को दिलाया शानदार सिल्वर मेडल
Asian Games Wushu: Roshibina Devi Wins Silver Medal for India

हांगझोउ/नागोया: एशियन गेम्स में भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारत की प्रमुख वुशु एथलीट नाओरेम रोशिबिना देवी (Naorem Roshibina Devi) ने महिलाओं की 60 किग्रा सांडा (Sanda) स्पर्धा में देश के लिए सिल्वर मेडल (रजत पदक) जीतकर इतिहास रच दिया है।

फाइनल मुकाबले में रोशिबिना ने अपने आक्रामक किक और बेहतरीन टैकल से चीनी प्रतिद्वंद्वी को जबरदस्त टक्कर दी। हालांकि, घरेलू परिस्थितियों और तकनीकी अंकों के आधार पर विरोधी खिलाड़ी ने मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया, जिससे रोशिबिना को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

ब्रॉन्ज से सिल्वर तक का स्वर्णिम सफर

रोशिबिना देवी का एशियन गेम्स में यह लगातार दूसरा पदक है और उन्होंने अपने पिछले रिकॉर्ड को और बेहतर किया है:

  • 2018 जकार्ता एशियन गेम्स: रोशिबिना ने 60 किग्रा सांडा वर्ग में पहली बार अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी छाप छोड़ते हुए कांस्य पदक (Bronze) जीता था।

  • रंग बदला मेडल का: इस संस्करण में उन्होंने अपने खेल के स्तर को ऊपर उठाते हुए कांस्य को रजत पदक (Silver) में बदला और साबित किया कि वे एशियाई स्तर पर इस खेल की शीर्ष दावेदारों में से एक हैं।

  • सेमीफाइनल में एकतरफा जीत: फाइनल से पहले सेमीफाइनल बाउट में रोशिबिना ने वियतनामी खिलाड़ी को राउंड्स के आधार पर पूरी तरह धोकर फाइनल का टिकट पक्का किया था।

संघर्षों से तराशा गया करियर: मणिपुर की शान

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के कुंबी गांव की रहने वाली रोशिबिना देवी एक साधारण किसान परिवार से आती हैं:

  1. शुरुआती प्रेरणा: बचपन से ही मार्शल आर्ट्स के प्रति गहरा रुझान रखने वाली रोशिबिना ने जूनियर स्तर पर ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना शुरू कर दिया था।

  2. अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित: अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और विश्व चैंपियनशिप में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार उन्हें प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित कर चुकी है।

  3. मानसिक दृढ़ता: गृह राज्य में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद रोशिबिना ने अपने प्रशिक्षण पर असर नहीं पड़ने दिया और देश के लिए पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया।

भारतीय खेल जगत ने दी बधाई

रोशिबिना की इस ऐतिहासिक सफलता पर खेल मंत्री, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने उन्हें बधाई दी है। अधिकारियों ने कहा कि वुशु जैसे अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और पारंपरिक चीनी दबदबे वाले खेल में भारतीय एथलीट का पोडियम तक पहुंचना देश के मार्शल आर्ट्स परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

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