वाइब्रेंट गुजरात 2027 से निवेश और रोजगार को मिलेगा नया प्रोत्साहन, विनिर्माण और नई तकनीकों के दम पर विकास की नई उड़ान की तैयारी: इंडस्ट्री लीडर्स

Aug 31, 2026 - 12:39
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वाइब्रेंट गुजरात 2027 से निवेश और रोजगार को मिलेगा नया प्रोत्साहन, विनिर्माण और नई तकनीकों के दम पर विकास की नई उड़ान की तैयारी: इंडस्ट्री लीडर्स
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वाइब्रेंट गुजरात 2027 से निवेश और रोजगार को मिलेगा नया प्रोत्साहन, विनिर्माण और नई तकनीकों के दम पर विकास की नई उड़ान की तैयारी: इंडस्ट्री लीडर्स
वाइब्रेंट गुजरात 2027 से निवेश और रोजगार को मिलेगा नया प्रोत्साहन, विनिर्माण और नई तकनीकों के दम पर विकास की नई उड़ान की तैयारी: इंडस्ट्री लीडर्स

नई दिल्ली। जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले 'वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027' की तैयारियों ने गति पकड़ ली है। इसी क्रम में नई दिल्ली में आयोजित कर्टेन रेजर कार्यक्रम के दौरान उद्योग जगत के कई प्रमुख प्रतिनिधियों ने गुजरात को देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में से एक बताया। उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियां, तेज निर्णय प्रक्रिया और मजबूत बुनियादी ढांचा इसे निवेशकों की पहली पसंद बना रहे हैं। 

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल कुमार मिंडा ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वाइब्रेंट गुजरात केवल एक निवेश सम्मेलन नहीं, बल्कि एक ऐसा आर्थिक महोत्सव है जिसने पिछले डेढ़ दशक में देश और दुनिया के निवेशकों को गुजरात से जोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी शुरुआत की थी और तब से यह लगातार विस्तार और सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है।

मिंडा ने कहा, "कर्टेन रेजर कार्यक्रम में एक हजार से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों और निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। जो कंपनियां गुजरात में निवेश बढ़ाना चाहती हैं या नए प्रोजेक्ट स्थापित करने की योजना बना रही हैं, उनके लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है।"

उन्होंने आगे कहा कि धोलेरा में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है, जबकि साणंद में मारुति के नए ऑटोमोबाइल संयंत्र जैसी परियोजनाएं पूरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगी।

उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत के विनिर्माण क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी हैं और बड़े निवेशों के साथ इन इकाइयों को भी विस्तार के नए अवसर मिलेंगे। मिंडा ने गुजरात सरकार की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और तेज निर्णय लेने की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य निवेशकों के लिए सकारात्मक और आशावादी माहौल प्रदान कर रहा है।

वहीं, डीसीएम श्रीराम लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर अजय एस. श्रीराम ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि वाइब्रेंट गुजरात ने वर्षों से राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि आज हर राज्य निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा में है, ऐसे में गुजरात अपनी नीतियों और औद्योगिक माहौल के कारण अलग पहचान बनाए हुए है।

उन्होंने कहा, "उनकी कंपनी पिछले तीन दशकों से गुजरात में काम कर रही है। शुरुआत में स्थापित 100 टन क्षमता वाली कास्टिक सोडा इकाई आज बढ़कर 2,250 टन क्षमता तक पहुंच चुकी है। कंपनी ने राज्य में कई मूल्यवर्धित व्यवसाय विकसित किए हैं और आगे भी विस्तार की बड़ी योजनाएं हैं।"

अजय श्रीराम ने आगे कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में कंपनी ने गुजरात में लगभग 5,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। अब अगले चार से पांच वर्षों के दौरान सहयोगी कंपनियों और भागीदारों के साथ मिलकर 8,000 से 10,000 करोड़ रुपए तक अतिरिक्त निवेश करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास किसी भी देश की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसी सोच के साथ कंपनी गुजरात में अपने कारोबार का विस्तार जारी रखेगी।

इसके अलावा, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) संजय बंगा ने आईएएनएस से कहा कि टाटा पावर का गुजरात के साथ लंबे समय से मजबूत संबंध रहा है और कंपनी लगातार वाइब्रेंट गुजरात जैसे आयोजनों का हिस्सा रही है।

उन्होंने बताया कि गुजरात में कंपनी की 4,000 मेगावाट क्षमता वाली मुंद्रा परियोजना राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अलावा टाटा पावर के पास राज्य में लगभग 700 मेगावाट की सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं भी हैं।

संजय बंगा ने आगे आईएएनएस से कहा कि गुजरात सरकार ने हाल ही में कंपनी को 3 गीगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए भूमि आवंटित की है। उन्होंने राज्य सरकार के सहयोग और उद्योग समर्थक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों का समाधान तेजी से किया जाता है, जिससे निवेशकों का विश्वास मजबूत होता है।

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने गुजरात में एक संभावित जगह की पहचान की है, जहां तकनीकी और वाणिज्यिक व्यवहार्यता का अध्ययन किया जा रहा है। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं, तो टाटा पावर गुजरात सरकार के सहयोग से राज्य में और निवेश करेगी तथा परमाणु ऊर्जा परियोजना पर भी काम आगे बढ़ाएगी।

इनपुट : आईएएनएस

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