ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ाने से सामाजिक सुरक्षा को मिलेगा विस्तार, रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा होगी मजबूत: उद्योग संगठन

Sep 18, 2026 - 12:09
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ईपीएफओ की वेतन सीमा बढ़ाने से सामाजिक सुरक्षा को मिलेगा विस्तार, रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा होगी मजबूत: उद्योग संगठन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को 15,000 रुपए से बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह किए जाने के फैसले का उद्योग जगत और श्रमिक संगठनों ने स्वागत किया है।

उन्होंने गुरुवार को कहा कि यह कदम सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार करने, औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने और कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। फिक्की (एफआईसीसीआई) की महानिदेशक ज्योति विज ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ईपीएफओ वेतन सीमा में संशोधन लंबे समय से लंबित था। उन्होंने बताया कि पिछला संशोधन वर्ष 2014 में किया गया था और उसके बाद देश में वेतन स्तर, आय और रोजगार संरचना में काफी बदलाव आया है।

उन्होंने कहा, "सरकार द्वारा वेतन सीमा को 25,000 रुपए तक बढ़ाने का फैसला समय की मांग थी। इससे करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे के दायरे में आएंगे।" उन्होंने कहा कि यह निर्णय रोजगार के औपचारिकीकरण, कर्मचारियों को लंबे समय तक संगठन से जोड़े रखने और रिटायरमेंट सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा। ज्योति विज ने आगे कहा कि जब कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलते हैं तो उनका मनोबल बढ़ता है और नौकरी में स्थिरता आती है। इससे कर्मचारियों और संस्थानों दोनों को फायदा होता है। उन्होंने आईएएनएस से बताया कि अब बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी, जो पहले इस सुरक्षा कवच से बाहर थे, अपने भविष्य के लिए एक रिटायरमेंट फंड तैयार कर पाएंगे। उन्होंने कहा, "जब किसी व्यक्ति को यह भरोसा होता है कि सेवानिवृत्ति के बाद उसके पास आर्थिक सुरक्षा होगी, तो वह अधिक समर्पण के साथ काम करता है और लंबे समय तक संगठन के साथ जुड़ा रहता है।" वहीं, भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के अखिल भारतीय सचिव एवं बैंकिंग क्षेत्र प्रभारी गिरीश चंद्र आर्य ने भी इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि श्रमिक संगठन लंबे समय से ईपीएफओ वेतन सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे।

उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "सितंबर 2014 में तय की गई 15,000 रुपए की सीमा मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और बदलते वेतन ढांचे के हिसाब से काफी कम हो चुकी थी। लगभग 12 वर्षों बाद किया गया यह संशोधन कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम है।" गिरीश चंद्र आर्य ने आगे कहा कि इस फैसले का लाभ केवल करीब 55 लाख कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार की औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को संगठित क्षेत्र में लाने की नीति के तहत आने वाले समय में और अधिक कर्मचारी ईपीएफ, ईएसआई और बोनस जैसी योजनाओं के दायरे में आएंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल भविष्य निधि (पीएफ) में बढ़ोतरी का मामला नहीं है, बल्कि कर्मचारियों को दीर्घकालिक रूप से पेंशन और बीमा सुरक्षा भी प्रदान करेगा। इससे श्रमिकों और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। 

इनपुट : आईएएनएस

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