10 अक्टूबर का पंचांग
नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
10 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रात 9:19 बजे तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। शनिवार सुबह 6:25 बजे सूर्योदय और शाम 6:02 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, सुबह 5:51 चंद्रोदय और शाम 5:44 बजे चंद्रास्त होगा।
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेगा। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य के हस्त नक्षत्र में प्रवेश करने से सभी 12 राशियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा का सूर्य से मित्रता का संबंध माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, हस्त नक्षत्र 13वां नक्षत्र है, जिसका अर्थ 'हाथ' होता है। इस नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है।
शनिवार को रात 10:02 बजे तक ऐंद्र (इंद्र) योग रहेगा। वैदिक ज्योतिष में इंद्र योग एक बहुत ही शुभ, राजसी और प्रभावशाली योग माना जाता है। यह योग देवराज इंद्र के गुणों (नेतृत्व क्षमता, ऐश्वर्य, मान-सम्मान और उच्च पद) का प्रतीक है। ज्योतिष के 27 नित्य योगों में ऐंद्र (इंद्र) योग 26वें स्थान पर आता है।इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा।
शनिवार को दोपहर 3:35 से 5:13 बजे तक अमृतकाल रहेगा। ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, अमृतकाल एक अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समयावधि (मुहूर्त) है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सबसे अधिक होती है। यह समय नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ, और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
इस दिन राहुकाल सुबह 9:19 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहुकाल दिन का वह समय होता है, जिसे किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है।
शनिवार को गुलिक काल सुबह 6:25 से 7:52 बजे तक रहेगा। गुलिक काल को 'विषैला समय' भी कहा जाता है। यह एक उपग्रह है, जिसे अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस काल में किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम देते हैं। इस काल में कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, लेकिन जो काम पहले से चल रहे हैं, उनको जारी रखा जा सकता है। इस दिन यमगंड काल दोपहर 1:40 से 3:08 बजे तक रहेगा।
शनिवार को सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जब सूर्य कन्या राशि में हैं, तो इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कामकाज और बौद्धिक क्षमता पर विशेष रूप से पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान व्यावहारिक और योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी माना जाता है।
इस दिन चंद्रमा कन्या राशि में संचार करेगा। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा के कन्या राशि में होने (या जन्म कुंडली में कन्या राशि का चंद्रमा होने) का अर्थ है कि व्यक्ति का मन और भावनाएं विश्लेषणात्मक, व्यवस्थित और संवेदनशील स्वभाव की होती हैं।
शनिवार को दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहते हैं, जिसमें किसी खास दिन यात्रा करना या निकलना अशुभ माना जाता है।
इनपुट : आईएएनएस
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