आज आईटीआर भरने की अंतिम तिथि: आयकर विभाग ने गैर-ऑडिट करदाताओं से की तुरंत रिटर्न फाइल करने की अपील

Aug 31, 2026 - 15:46
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आज आईटीआर भरने की अंतिम तिथि: आयकर विभाग ने गैर-ऑडिट करदाताओं से की तुरंत रिटर्न फाइल करने की अपील
Income Tax Return

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने व्यवसाय या पेशेवर आय वाले उन करदाताओं को अंतिम याद दिलाई है, जिन्हें अपने खातों का ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं है। विभाग ने सोमवार को कहा कि आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है और पात्र करदाताओं को समय सीमा समाप्त होने से पहले अपना रिटर्न दाखिल एवं सत्यापित कर देना चाहिए। 

आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि 7 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं। विभाग ने कहा, "आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 7 करोड़ से अधिक आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं। व्यवसाय या पेशेवर आय वाले ऐसे करदाता जो ऑडिट के दायरे में नहीं आते, उनके लिए 31 अगस्त 2026 अंतिम तिथि है। अंतिम समय तक इंतजार न करें और आज ही अपना आईटीआर दाखिल करें।"

विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे रिटर्न दाखिल करते समय सही फॉर्म का चयन करें और अपनी आय की जानकारी पूरी सटीकता के साथ दर्ज करें। साथ ही, वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) में उपलब्ध जानकारी के साथ वित्तीय आंकड़ों का मिलान भी कर लें ताकि बाद में किसी प्रकार की त्रुटि या नोटिस की स्थिति न बने।

आमतौर पर आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से होती है और जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 दाखिल करने के पात्र नहीं होते। वहीं आईटीआर-4 (सुगम) उन पात्र निवासी व्यक्तियों, एचयूएफ और साझेदारी फर्मों के लिए उपलब्ध है, जो आयकर अधिनियम की धारा 44एडी, 44एडीए या 44एई के तहत अनुमानित कराधान योजना का लाभ लेते हैं।

आयकर विभाग ने चेतावनी दी है कि समय सीमा चूकने पर करदाताओं को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें विलंब शुल्क, बकाया कर पर ब्याज, रिफंड मिलने में देरी और कुछ कर लाभों का नुकसान शामिल है।

हालांकि यदि कोई करदाता आज की समयसीमा तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है, तो वह 31 दिसंबर 2026 तक विलंबित रिटर्न दाखिल कर सकता है, बशर्ते उससे पहले निर्धारण प्रक्रिया पूरी न हो जाए। लेकिन विलंबित रिटर्न दाखिल करने की स्थिति में कई महत्वपूर्ण लाभ समाप्त हो सकते हैं, जिनमें व्यावसायिक या पूंजीगत हानियों को अगले वर्षों में आगे ले जाने की सुविधा भी शामिल है।

नियमों के अनुसार, यदि किसी करदाता की कुल आय 5 लाख रुपए से अधिक है, तो धारा 234एफ के तहत 5,000 रुपए तक का विलंब शुल्क लगाया जा सकता है। यदि कुल आय 5 लाख रुपए से कम है, तो यह शुल्क अधिकतम 1,000 रुपए होगा।

इसके अतिरिक्त, जिन करदाताओं पर कर बकाया है, उन्हें धारा 234ए के तहत बकाया राशि पर प्रति माह 1 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना पड़ सकता है।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यवसाय या पेशेवर आय वाले वे करदाता जो डिफॉल्ट नई कर व्यवस्था से बाहर निकलकर पुरानी कर व्यवस्था का विकल्प चुनना चाहते हैं, उन्हें भी निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है।

इनपुट : आईएएनएस

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