घटिया स्मार्टफोन स्क्रीन गार्ड्स पर लगा बैन; 1 अप्रैल 2027 से BIS मानकों के बिना नहीं बिकेगा टेम्पर्ड ग्लास
भारत सरकार ने घटिया और गैर-मानक स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर्स (टेम्पर्ड ग्लास) की बिक्री पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार, 1 अप्रैल 2027 से देश में केवल वही स्क्रीन प्रोटेक्टर्स बनाए, आयात किए या बेचे जा सकेंगे जो भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के गुणवत्ता मानक 'IS 19348:2025' के तहत अनिवार्य पंजीकरण प्राप्त होंगे। जानिए सरकार के नए BIS नियमों, कड़े परीक्षण मानकों और मोबाइल यूजर्स पर पड़ने वाले प्रभाव पर पूरी विस्तृत रिपोर्ट।
नई दिल्ली: स्मार्टफोन की डिस्प्ले सुरक्षा के नाम पर बाजार में बिक रहे घटिया, सस्ते और अविश्वसनीय स्क्रीन गार्ड्स पर केंद्र सरकार ने बड़ा शिकंजा कस दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर्स को अनिवार्य भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) पंजीकरण दायरे में शामिल कर लिया है।
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 1 अप्रैल 2027 से देश में उन सभी स्मार्टफोन स्क्रीन गार्ड्स के निर्माण, आयात, भंडारण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा जो निर्धारित भारतीय मानकों पर खरे नहीं उतरते।
क्या है नया BIS मानक 'IS 19348:2025'?
मंत्रालय ने 'इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सामान (अनिवार्य पंजीकरण आवश्यकता) आदेश, 2021' में संशोधन करते हुए स्क्रीन प्रोटेक्टर्स को 66वें उत्पाद के रूप में अधिसूचित किया है। अब निर्माताओं को भारतीय मानक IS 19348:2025 के तहत कड़े परीक्षण पास करने होंगे:
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ग्लास और सतह की मजबूती: स्क्रीन गार्ड के ग्लास की मोटाई, टेंपरिंग स्तर और उसकी शॉक-एब्जॉर्बिंग क्षमता (इम्पैक्ट रेसिस्टेंस) की कड़ी जांच होगी।
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ऑप्टिकल क्लैरिटी और ट्रांसमिशन: ग्लास की पारदर्शिता और डिस्प्ले रंगों की स्पष्टता तय मानकों के अनुसार होनी चाहिए, ताकि यूजर्स की आंखों पर बुरा असर न पड़े।
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कोटिंग और सुरक्षा फिल्म: एंटी-शैटर (कांच टूटने पर बिखरने से रोकने वाली फिल्म), ओलेओफोबिक कोटिंग (फिंगरप्रिंट और तेल प्रतिरोधी) और एंटी-ग्लेयर मानकों का पालन अनिवार्य होगा।
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पैकेजिंग पर स्पष्ट विवरण: पैकेजिंग पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, ग्लास की सटीक मोटाई और बीआईएस रजिस्ट्रेशन मार्क प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
1 अप्रैल 2027 तक का ट्रांजिशन पीरियड
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किया जा रहा है। निर्माताओं, आयातकों और वितरकों को अपनी सप्लाई-चेन दुरुस्त करने, उत्पाद परीक्षण पूरा करने और बीआईएस पंजीकरण हासिल करने के लिए पर्याप्त समय (1 अप्रैल 2027 तक) दिया गया है। इस समय-सीमा के बाद बिना बीआईएस मार्क वाले किसी भी अनब्रांडेड या घटिया टेम्पर्ड ग्लास को बाजार में बेचना गैरकानूनी माना जाएगा।
बाजार और उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर?
| पहलू | मौजूदा स्थिति | 1 अप्रैल 2027 के बाद |
| बाजार संरचना | लगभग 90% बाजार गैर-संगठित और सस्ते विदेशी आयातों पर निर्भर। | केवल पंजीकृत और प्रमाणित ब्रांड्स ही बाजार में मौजूद रहेंगे। |
| उपभोक्ता सुरक्षा | 50-100 रुपये के कई स्क्रीन गार्ड गिरने पर फोन की मूल स्क्रीन नहीं बचा पाते। | प्रमाणित क्रैश-रेसिस्टेंस और टिकाऊ ग्लास डिस्प्ले को वास्तविक सुरक्षा देगा। |
| कीमतें | बिना किसी गुणवत्ता मानक के अत्यंत सस्ती दरों पर उपलब्ध। | कड़े परीक्षण और प्रमाणन लागत के चलते शुरुआती कीमतों में मामूली वृद्धि संभव। |
| घरेलू विनिर्माण | अधिकांश ग्लास विदेशों से रेडीमेड आयात होते हैं। | 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा; घरेलू कंपनियां स्थानीय स्तर पर यूनिट्स लगा रही हैं। |
'मेक इन इंडिया' और घरेलू इंडस्ट्री को बड़ा सहारा
मोबाइल इंडस्ट्री संगठन ICEA के अनुसार, भारत में प्रति वर्ष 50 करोड़ से अधिक स्क्रीन प्रोटेक्टर्स की खपत होती है। नए बीआईएस नियम लागू होने से न केवल उपभोक्ताओं को नकली और घटिया उत्पादों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यह कदम 12,000 से 16,000 करोड़ रुपये के एक गुणवत्ता-आधारित घरेलू उद्योग को जन्म देगा और हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगा। घरेलू कंपनियां (जैसे ऑप्टिमस इन्फ्राकॉम आदि) पहले ही वैश्विक ग्लास निर्माताओं के साथ साझेदारी कर भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन की तैयारी शुरू कर चुकी हैं।
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