Haiwaan Movie Review: अक्षय कुमार और सैफ अली खान की डार्क थ्रिलर में दिखा दम
लगभग 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी निर्देशक प्रियदर्शन की डार्क साइकोलॉजिकल थ्रिलर 'हैवान' (Haiwaan) के साथ बड़े पर्दे पर लौट आई है। मलयालम की सुपरहिट थ्रिलर 'ओप्पम' की यह आधिकारिक रीमेक एक दृष्टिहीन नायक और एक निर्दयी कातिल के बीच बिल्ली-चूहे की खतरनाक जंग पर आधारित है। जानिए 'हैवान' की कहानी, एक्टिंग, निर्देशन और वीकेंड वर्डिक्ट पर पूरी विस्तृत समीक्षा।
मुंबई: जब-जब अक्षय कुमार और सैफ अली खान एक साथ पर्दे पर आए हैं ('मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी', 'ये दिल्लगी', 'टशन'), दर्शकों ने उनकी कॉमिक और एक्शन केमिस्ट्री को खूब सराहा है। लेकिन 18 साल बाद निर्देशक प्रियदर्शन की क्राइम-साइकोलॉजिकल थ्रिलर 'हैवान' (Haiwaan) में यह जोड़ी हंसी-मजाक के लिए नहीं, बल्कि एक-दूसरे के खून के प्यासे दुश्मनों के रूप में टकराई है।
मोहनलाल अभिनीत 2016 की प्रशंसित मलयालम फिल्म 'ओप्पम' (Oppam) पर आधारित यह फिल्म सस्पेंस, बदले और न्याय की एक अंधेरी दुनिया में ले जाती है।
फिल्म की कहानी और कथानक
कहानी का केंद्र श्याम (सैफ अली खान) है, जो जन्म से दृष्टिहीन है लेकिन उसकी सुनने, सूंघने और स्पर्श की इंद्रियां सामान्य इंसानों से कई गुना तेज हैं। श्याम मुंबई की एक हाई-राइज इमारत में मेंटेनेंस और केयरटेकर का काम करता है। इसी इमारत में रहने वाले एक रिटायर्ड जज प्रधान (बोमन ईरानी) का श्याम पर अटूट विश्वास है।
कहानी में भूचाल तब आता है जब जज प्रधान की उनके ही फ्लैट में बेरहमी से हत्या कर दी जाती है और संयोगवश श्याम खुद को उस कमरे में फंसा पाता है। पुलिस की नजर में अंधा श्याम ही मुख्य संदिग्ध बन जाता है। लेकिन असल खतरा जेल से छूटा खूंखार कातिल परशुराम (अक्षय कुमार) है, जो अतीत के बदले की आग में जल रहा है और जज की मासूम बेटी नंदिनी को मिटाना चाहता है। इसके बाद शुरू होती है एक अंधे रक्षक और एक दरिंदे शिकारी के बीच लुका-छिपी की सांस रोक देने वाली दास्तान।
अभिनय: संयम बनाम आक्रामकता
-
सैफ अली खान: एक दृष्टिहीन व्यक्ति के रूप में सैफ ने अपने बॉडी लैंग्वेज और एक्सप्रेशंस पर गहरी मेहनत की है। बिना आंखों के संपर्क के केवल आहटों और सांसों के जरिए खतरे को भांपने वाले दृश्यों में सैफ का अभिनय काफी संतुलित और भावुक है।
-
अक्षय कुमार: अरसे बाद अक्षय कुमार अपने चॉकलेटी और देशभक्ति वाले खांचे से बाहर निकलकर विशुद्ध डार्क व नकारात्मक अवतार में दिखे हैं। उनका रफ लुक, दाढ़ी और स्क्रीन प्रेजेंस एक ठंडा खौफ पैदा करते हैं। अक्षय ने बिना ओवर-द-टॉप चीख-पुकार के अपने किरदार के भीतर का पागलपन पर्दे पर उतारा है।
-
सपोर्टिंग कास्ट: बोमन ईरानी अपनी संक्षिप्त भूमिका में गरिमा लाते हैं, जबकि शारिब हाशमी ने पुलिसिया जांच के दृश्यों में अच्छा प्रभाव छोड़ा है। वहीं, ओरिजिनल फिल्म के नायक मोहनलाल का एक छोटा सरप्राइज कैमियो सिनेमाई दर्शकों के लिए एक सुखद तोहफा बनकर सामने आता है।
निर्देशन, संगीत और तकनीकी पहलू
कॉमेडी के उस्ताद माने जाने वाले प्रियदर्शन ने थ्रिलर जॉनर में अपनी पुरानी पकड़ ('विरासत', 'कालपानी') को दोहराने की ईमानदार कोशिश की है:
-
मजबूत पक्ष: फिल्म की लाइटिंग, सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर (BGM) एक लगातार तनाव बनाए रखने में कामयाब होते हैं। खासकर सेकेंड हाफ में जब दोनों मुख्य सितारे आमने-सामने आते हैं, तो गति और रोमांच चरम पर पहुंच जाता है।
-
कमजोर पक्ष: फिल्म की सबसे बड़ी खामी इसका खिंचा हुआ फर्स्ट हाफ और करीब 164 मिनट (2 घंटे 44 मिनट) का लंबा रनटाइम है। थ्रिलर के बीच में गानों की बेतरतीब मौजूदगी कहानी की गति को बाधित करती है। एडिटिंग टेबल पर 15-20 मिनट की कैंची इसे कहीं अधिक धारदार बना सकती थी।
अंतिम फैसला (Verdict)
'हैवान' कोई साधारण मसाला फिल्म नहीं है, बल्कि यह क्लासिक ओल्ड-स्कूल कैट-एंड-माउस थ्रिलर है। यदि आप कसी हुई गति और छोटे रनटाइम की तलाश में हैं तो शुरुआती हिस्सा थोड़ा धैर्य मांगता है। लेकिन अक्षय कुमार का खतरनाक विलेन अवतार, सैफ अली खान की संवेदनशील एक्टिंग और आखिरी घंटे का जबर्दस्त तनाव इसे बड़े पर्दे पर देखने लायक डार्क थ्रिलर बनाता है।
-
रेटिंग: 3.5 / 5 स्टार (सस्पेंस और दोनों दिग्गजों की अदाकारी के नाम)
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)