एंटी करप्शन मेरठ की बड़ी कार्रवाई: आवास विकास का आउटसोर्स कर्मचारी रिश्वत लेते गिरफ्तार, मचा हड़कंप
- पीएम आवास की रजिस्ट्री कराने के नाम पर महिला से छह हजार की रिश्वत मांगने का आरोप.
नॉकआउट न्यूज रिपोर्टर मेरठ। पीएम आवास योजना के तहत मिले मकान की रजिस्ट्री के लिए भी रिश्वत का खेल सामने आया है। आरोपी ने पीएम आवास योजना की लाभार्थी महिला से मकान की रजिस्ट्री कराने के नाम पर रकम मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और कार्यालय में ही आरोपी को रिश्वत की रकम के साथ दबोच लिया। आवास विकास कार्यालय में तैनात आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव को एंटी करप्शन मेरठ की टीम ने मंगलवार को छह हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
एंटी करप्शन टीम के अनुसार, किनानगर निवासी रंजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मकान आवंटित हुआ था। आवंटन के बाद मकान की रजिस्ट्री होनी थी। आरोप है कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर आवास विकास कार्यालय में आउटसोर्स कर्मचारी अभिनव ने महिला से छह हजार रुपये की रिश्वत मांगी। महिला ने रिश्वत मांगे जाने की शिकायत एंटी करप्शन टीम से कर दी।
शिकायत पर पहले सत्यापन, फिर ट्रैप शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने आरोपों का सत्यापन कराया। शिकायत सही पाए जाने के बाद आरोपी को रंगेहाथ पकड़ने की योजना तैयार की गई। मंगलवार को महिला को केमिकल लगे नोट देकर आवास विकास कार्यालय भेजा गया। महिला ने जैसे ही आरोपी को छह हजार रुपये दिए, पहले से आसपास मौजूद एंटी करप्शन टीम के सदस्यों ने उसे पकड़ लिया।
मचा हड़कंप: सरकारी कार्यालय में रिश्वत लेते कर्मचारी की गिरफ्तारी से वहां हड़कंप मच गया। टीम ने आरोपी के कब्जे से रिश्वत की रकम बरामद की और उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद टीम आरोपी को अपने साथ ले गई। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
आवास विकास की कार्यप्रणाली पर सवाल: रजिस्ट्री के नाम पर वसूली का दायरा खंगालेगी टीम आरोपी आउटसोर्स कर्मचारी है, लेकिन सरकारी योजना के लाभार्थी से रजिस्ट्री के नाम पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आने के बाद आवास विकास कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।
आरोपी कर्मचारी से पूछताछ कर रही टीम: एंटी करप्शन टीम आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि क्या छह हजार रुपये की यह मांग अकेले कर्मचारी ने की थी या इसके पीछे किसी अधिकारी-कर्मचारी की भी भूमिका थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अन्य प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से भी रजिस्ट्री अथवा दूसरी प्रक्रिया के नाम पर रकम तो नहीं मांगी गई।
चार बच्चों के साथ अकेली रहती है रंजना: रंजना किनानगर की रहने वाली है। उसके पति देवेंद्र प्राइवेट जॉब करते थे लेकिन कोरोना काल में उनकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद रंजना अपने चारों बच्चों के साथ रहने लगी। वह वर्तमान में जेठ जेठानी के साथ रहती है। पिछले साल रंजना ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 33 मीटर मकान के लिए आवेदन किया था। फरवरी में मकान आवंटित हो गया।
ब्याज पर पैसा लेकर जमा किए 76 हजार: फरवरी में मकान निकलने के बाद रंजना को डाउन पेमेंट 76 हजार रूपए जमा करने थे। रंजन ने 2% ब्याज पर पैसा उठाया और 76 हजार रूपए जमा कर दिया। कुछ दिन बाद रंजना ने आवास एवं विकास परिषद के शास्त्री नगर स्थिति ऑफिस में आकर संपर्क किया। रंजन बताती हैं कि यहां अरुण नाम के कर्मचारियों पर उनकी फाइल थी लेकिन बाद में वह फाइल अभिनव शर्मा के पास पहुंच गई।
रजिस्ट्री-पजेशन कराने को मांगे 6200 रूपए: रंजना को मकान के लिए 6.75 लाख रूपए जमा करने हैं। 76 हजार रूपए वह डाउन पेमेंट जमा कर चुकी थी। 3230 रूपए की तीन किस्त भी जमा हो चुकी थी। अब रंजना को रजिस्ट्री करानी थी लेकिन अभिनव शर्मा के पास फाइल पहुंचने के बाद काम रुक गया। अभिनव ने सीधे फाइल आगे बढ़ाने का 6200 रूपए खर्चा बताया।
परेशान होकर एंटी करप्शन से की शिकायत: अभिनव शर्मा लगातार रंजना पर रुपए देने का दबाव बना रहा था। परेशान होकर रंजना ने एंटी करप्शन से शिकायत की। रंजना को 6000 रूपए देने थे। उसने अपनी कानों की बाली गिरवी रख दी और 6000 रूपए एंटी करप्शन को दे दिए। केमिकल लगे यह नोट लेकर रंजना आवास विकास पहुंची। सीट पर जाकर रंजना ने अभिनव को 6000 दिए और तभी एंटी करप्शन ने अभिनव को दबोच लिया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)