कॉरपोरेट अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दवाओं पर 16 प्रतिशत मार्जिन का फॉर्मूला तय करने का सुझाव

Sep 29, 2026 - 18:12
0 1
कॉरपोरेट अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दवाओं पर 16 प्रतिशत मार्जिन का फॉर्मूला तय करने का सुझाव
Supreme Court takes a strict stance

नई दिल्ली । कैंसर की दवाओं की एमआरपी और प्राइस टू रिटेलर (पीटीआर) के बीच भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर केंद्र सरकार से कड़े सवाल किए हैं। कोर्ट ने कहा कि दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था में ऐसा अंतर क्यों है और क्या आवश्यक वस्तुओं को मूल्य नियंत्रण से बाहर रखा जा सकता है। 

 DPC0 और आवश्यक दवाओं के वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल

जस्टिस संदीप मेहता ने सुनवाई के दौरान कहा कि 27,000 रुपए एमआरपी वाली कैंसर की एक दवा का प्राइस टू रिटेलर करीब 3,000 रुपए है। उन्होंने कहा, 'जरा इस भारी अंतर को देखिए।' यानी रिटेलर और अस्पताल को दवा 3 हजार में मिल रही है लेकिन मरीज से 27 हजार वसूले जा रहे हैं।जस्टिस मेहता ने पूछा कि डीपीसीओ (दवा मूल्य नियंत्रण आदेश) में आवश्यक और गैर-आवश्यक दवाओं के बीच अंतर क्यों किया गया है? कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की दवा को गैर-आवश्यक कैसे माना जा सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने कॉरपोरेट अस्पतालों की मनमानी पर भी सवाल उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉरपोरेट अस्पताल मरीजों को अक्सर अपनी इन-हाउस फार्मेसी से ही दवा खरीदने के लिए कहते हैं और बाहर की दवा नहीं लेने देते। इससे मरीजों का शोषण हो रहा है।सबसे बड़ा सवाल सरकारी योजनाओं को लेकर था। कोर्ट ने पूछा कि अगर मरीज का इलाज किसी सरकारी योजना जैसे आयुष्मान भारत के तहत हो रहा है, तो इन दवाओं की महंगी कीमत का भुगतान कौन करता है? जाहिर है 'टैक्सपेयर।' अस्पताल सरकार से 27 हजार का बिल वसूलता है, जबकि दवा 3 हजार की है। बाकी का पैसा टैक्सपेयर की जेब से जा रहा है।

मामले की अगली सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि 16 प्रतिशत का एक समान मानदंड क्यों नहीं हो सकता? कोर्ट ने कहा कि जैसे डीपीसीओ वाली दवाओं पर रिटेलर के लिए 16 प्रतिशत मार्जिन तय है, वैसे ही सभी दवाओं पर एक निश्चित मार्जिन क्यों नहीं हो सकता? इसके ऊपर कुछ भी क्यों हो?कोर्ट ने कहा कि हर मेडिकल डिवाइस और हर दवा आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में आती है। ऐसे में सवाल है कि अगर कोई वस्तु आवश्यक है तो उसे डीपीसीओ से बाहर कैसे रखा जा सकता है?केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में कोई रास्ता निकालना होगा। उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कह रहे कि याचिकाकर्ता गलत हैं लेकिन ऐसा समाधान तलाशना होगा जो सभी पक्षों के हितों में संतुलन बनाए। उन्होंने कहा कि उनकी समझ के मुताबिक इस व्यवस्था से फार्मा कंपनियां लाभ पाने वाली पक्ष नहीं हैं बल्कि बीच की चेन लाभ ले रही है।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की है और केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

इनपुट : आईएएनएस

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
KNOCKOUT NEWZ DIGITAL

Welcome to Knockout Newz Website. - Knockout Newz brings you the latest Breaking News, India News, Uttar Pradesh News, cities news, Politics, Trending, Sports, Entertainment, Business and Technology updates. Stay informed with fast, accurate and reliable journalism.

Comments (0)

User