भारत की आर्थिक मजबूती समावेशी विकास पर निर्भर करेगी: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि देश की आर्थिक मजबूती आखिरकार इस बात पर निर्भर करेगी कि विकास का फायदा हर नागरिक और क्षेत्र तक पहुंचता है या नहीं।
'5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव' में उद्घाटन भाषण देते हुए, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि मुश्किल हालात का सामना करने की असली क्षमता का पैमाना यह है कि "हम यह सुनिश्चित करें कि कोई भी नागरिक या कोई भी क्षेत्र पीछे न छूटे। सिर्फ जीडीपी ही विकास का पैमाना नहीं हो सकता।"
महिला सशक्तीकरण और शिक्षा पर जोर
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने समावेशी एजेंडे में महिलाओं की भागीदारी को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि शिक्षा और आर्थिक मौकों तक पहुंच मिलने से महिलाएं ज्यादा से ज्यादा लीडरशिप की भूमिकाएं निभा पाएंगी।
उन्होंने कहा, "हम महिलाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं, उन्हें शिक्षा का अधिकार देना चाहते हैं और वे खुद को सशक्त बनाएंगी।"
विकसित भारत का लक्ष्य और समावेशी नीतियां
उन्होंने कहा कि भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था से विकसित अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए सकारात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नीति-निर्माताओं को मुख्य विकास दर के साथ-साथ समावेशिता पर भी ध्यान देना होगा।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा, "समावेशिता मुश्किल हालात का सामना करने की क्षमता का एक जरिया बन सकती है।" उन्होंने कहा कि इस क्षमता को सिर्फ वित्तीय बाजारों या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
जन धन-आधार-मोबाइल और सीधा लाभ
वित्तीय समावेश और कल्याणकारी लाभों के वितरण में सुधार यह दिखाते हैं कि कैसे सामाजिक समावेश खुद किसी अर्थव्यवस्था की झटकों को सहने की क्षमता को मजबूत कर सकता है।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इस नजरिए के उदाहरण के तौर पर जन धन-आधार-मोबाइल (जेएएम) आर्किटेक्चर का जिक्र किया, जिसने बड़े पैमाने पर वित्तीय समावेश और सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) को मुमकिन बनाया।
गरीबी में कमी और जीएसटी का असर
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बताया कि पिछले दशक में 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय गरीबी से बाहर निकले हैं। उन्होंने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) को भारत का सबसे बड़ा टैक्स सुधार बताया।
जीडीपी में मजबूत बढ़त के आंकड़े
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (क्वार्टर 1) में भारत की वास्तविक जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह वृद्धि 6.9 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी (स्थिर कीमतों पर) 81.36 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह 75.46 लाख करोड़ रुपए थी।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)