सेना की ताकत पर सवाल उठाना गैर-जिम्मेदाराना, रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने आईटीबीपी डीजी को घेरा
एजेंसी, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के रिटायर्ड कर्नल अजय रैना ने आईटीबीपी के महानिदेशक (डीजी) शत्रुजीत कपूर द्वारा चीन को लेकर दिए गए हालिया बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने इस बयान को गैर-जिम्मेदाराना और राजनीति से प्रेरित करार देते हुए कहा कि एक अर्धसैनिक बल के प्रमुख को इस तरह सार्वजनिक मंच से भारतीय सेना की क्षमता पर सवाल उठाना शोभा नहीं देता।
10 महीने के कार्यकाल में इतना बड़ा विश्लेषण कैसे, नियुक्ति पर उठाए सवाल
अजय रैना ने डीजी के बयान के आधार और पृष्ठभूमि पर सीधे सवाल खड़े किए:
बाहरी नियुक्ति पर टिप्पणी: उन्होंने कहा कि डीजी एक आईपीएस अधिकारी हैं और सैन्य पृष्ठभूमि से नहीं आते। उनकी नियुक्ति जनवरी में हुई थी और वे 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। महज 10 महीने के कार्यकाल में उन्होंने इतना बड़ा विश्लेषण किस आधार पर कर लिया?
सेना के नियंत्रण का जिक्र: एलएसी पर आईटीबीपी और भारतीय सेना साथ तैनात रहती हैं, लेकिन युद्ध की स्थिति में पूरा कमान और नियंत्रण भारतीय सेना के हाथों में होता है।
गलवान में साबित हो चुकी है ताकत, चीनी आधुनिकीकरण के दावों का जवाब
रिटायर्ड कर्नल ने भारत की सैन्य तैयारियों और क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा:
बराबरी और क्षमता का सवाल: यह कहना पूरी तरह गलत है कि भारत चीन से मुकाबला नहीं कर सकता। भारतीय सेना ने अपने आधुनिकीकरण और रणनीति की ताकत दुनिया को दिखाई है।
गलवान का उदाहरण: युद्धक्षेत्र में सेना की तैनाती और वास्तविक क्षमता के मामले में भारत चीनी सेना से पूरी तरह निपटने में सक्षम है, जिसे भारतीय जवानों ने गलवान घाटी में साबित करके दिखाया था।
सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीति बंद करने की अपील
देश के मौजूदा माहौल और बयानों के समय पर रैना ने चिंता जताई:
पुरानी घटनाओं का हवाला: उन्होंने याद दिलाया कि दो साल पहले भी लद्दाख के एसएसपी ने पूर्वी लद्दाख को लेकर विवादित रिपोर्ट दी थी, जिसे बाद में कार्रवाई होने पर वापस लेना पड़ा था।
नेताओं से आग्रह: देश में विरोध और राजनीतिक बयानबाजी के बीच ऐसे बयानों से गलत संदेश जाता है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति न करने की अपील की।
एलएसी की जमीनी हकीकत: वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्पष्ट सीमा स्तंभ नहीं होने के कारण दोनों सेनाएं गश्त के दौरान आमने-सामने आ जाती हैं। वहां गोलीबारी के बजाय तय प्रोटोकॉल और सहमति के आधार पर स्थिति संभाली जाती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)