सहारनपुर में नकली करेंसी के मामले में पीएनबी के 14 कर्मचारियों का दक्षिण भारत में तबादला

Oct 31, 2026 - 13:03
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सहारनपुर में नकली करेंसी के मामले में पीएनबी के 14 कर्मचारियों का दक्षिण भारत में तबादला
सहारनपुर

सहारनपुर।उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर में घंटाघर के पास स्थित पंजाब नेशनल बैंक की मुख्य शाखा में 17 करोड़ 29 लाख रुपये की भारी-भरकम नकली करेंसी मिलने के मामले में जांच और कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस वित्तीय धोखाधड़ी के सामने आने के बाद बैंक प्रशासन और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं।

सहारनपुर के घंटाघर स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा में नकली नोट मिलने के मामले में बड़ी कार्रवाई

इस बड़े मामले के प्रकाश में आने के बाद बैंक प्रबंधन ने आंतरिक स्तर पर कड़ा कदम उठाया है। उस दौरान बैंक में तैनात रहे 14 कर्मचारियों का प्रशासनिक आधार पर दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों में तबादला कर दिया गया है। यह सभी कर्मचारी उस समयावधि में अपनी सेवाएं दे रहे थे, जब करेंसी चेस्ट की मुख्य जिम्मेदारी आरोपी प्रबंधक अमित कुमार, सुशील कुमार और मंडल प्रबंधक रवि कांसे के हाथों में थी।

शिकायत और जाली नोटों का बढ़ता आंकड़ा

इस पूरे प्रकरण की औपचारिक शुरुआत 29 अगस्त को हुई थी, जब मेरठ मंडल के पीएनबी मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार चौबे की ओर से सात करोड़ रुपये की नकली करेंसी मिलने की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके ठीक अगले दिन यानी 30 अगस्त को जब चेस्ट की जांच का दायरा बढ़ाया गया, तो नकली नोटों की यह संख्या बढ़कर 17 करोड़ 29 लाख रुपये तक पहुंच गई।

मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी को ट्रांसफर

शुरुआती दौर में स्थानीय पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की थी, लेकिन वित्तीय और सुरक्षा से जुड़े गंभीर पहलुओं को देखते हुए 3 सितंबर को इस पूरे केस को राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दिया गया। केंद्रीय एजेंसी ने मामले की गहनता को समझते हुए ताबड़तोड़ दबिशें दीं, जिसके परिणामस्वरूप अब तक कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

अब तक की गिरफ्तारियां और आगे की जांच

एनआईए की कार्रवाई में पकड़े गए आरोपियों में पूर्व करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार और बैंक का संविदा चालक आदेश चौधरी भी शामिल हैं। इसके अलावा पांच अन्य संदिग्धों को रुड़की, अंबाला, सोनीपत और हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है। बैंक कर्मियों के अन्य राज्यों में तबादले और कई गिरफ्तारियों के बावजूद, इस अंतरराज्यीय रैकेट की पूरी सच्चाई और इस काले कारोबार के पीछे के अन्य मुख्य चेहरों का बेनकाब होना अभी बाकी है।

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प्रियांशी सिरोही

प्रियांशी सिरोही - ( कंटेंट राइटर )

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