भारत-ब्रिटेन व्यापार को नई रफ्तार: दोनों परिषदों के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता
एजेंसी, नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के अमल में आने के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद और यूके-भारत व्यापार परिषद ने द्विपक्षीय व्यापार, पूंजी निवेश और औद्योगिक तालमेल को प्रगाढ़ करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
संस्थागत सहयोग और कारोबारी बैठकें
इस समझौते के माध्यम से दोनों देशों के निजी क्षेत्रों को आपस में जोड़ने के लिए मजबूत ढांचा तैयार किया गया है:
लघु एवं मध्यम उद्योगों पर ध्यान: दोनों देशों के छोटे और मझोले उद्यमों के लिए नए बाजारों के द्वार खोलने, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के दौरों और बाजार के सटीक आंकड़ों को साझा करने पर जोर दिया जाएगा।
लंदन में बड़ा सम्मेलन: समझौते के अवसर पर लंदन में प्रत्यक्ष कारोबारी बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें भारत की 48 निर्यातक कंपनियों और ब्रिटेन के 150 आयातकों ने भाग लेकर नए सौदों पर चर्चा की।
प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए नए अवसर
ब्रिटेन के विशाल खाद्य बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं:
बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य: ब्रिटेन प्रतिवर्ष लगभग पचास अरब डॉलर से अधिक मूल्य के प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का आयात करता है, जिसमें भारत की वर्तमान हिस्सेदारी मात्र 0.6 प्रतिशत है।
सीमा शुल्क में बड़ी राहत: नए व्यापार समझौते के तहत प्रसंस्कृत खाद्य पर ब्रिटेन द्वारा लगाए जाने वाले सत्तर प्रतिशत तक के भारी शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त झींगा मछली और तैयार कॉफी पर लगने वाले शुल्कों को भी हटा दिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातक सीधे प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
विशाल शुल्क-मुक्त पहुंच: भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद के अनुसार, अब भारत के 99 प्रतिशत उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिल रहा है।
बढ़ता द्विपक्षीय कारोबार
व्यापार का आकार: वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार 48 अरब पाउंड (लगभग 65 अरब डॉलर) के स्तर तक पहुंच चुका है।
पारंपरिक दायरे से आगे विस्तार: विशेषज्ञ मानते हैं कि शुल्क समाप्ति के बाद भारतीय खाद्य उत्पादक केवल वहां रहने वाले भारतीय समुदाय तक सीमित न रहकर ब्रिटेन के मुख्यधारा के खुदरा बाजारों और बड़े भोजनालयों तक अपनी मजबूत पकड़ बना सकेंगे, जिससे देश में निर्यात और रोजगार दोनों में वृद्धि होगी।
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