चुनाव आयोग ने एसआईआर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों को बताया सामूहिक

Oct 27, 2026 - 15:07
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चुनाव आयोग ने एसआईआर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों को बताया सामूहिक
Supreme Court

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। हलफनामे में कहा कि जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी किए गए तीनों एसआईआर आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने माना कि ऑनलाइन फॉर्म को देखकर ऐसा लग सकता था कि उसमें संशोधन किया गया है। 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म 6 और घोषणा-पत्र अलग-अलग दिखाए जाएंगे, जैसा कि भौतिक फॉर्म में है। यह हलफनामा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया था। निर्वाचन आयोग ने कहा कि उसके समक्ष दाखिल किए गए प्रति-हलफनामे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।  

ईसीआई ने कहा है कि मैपिंग नहीं होने वाले मतदाताओं को सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना जरूरी नहीं होगा। बीएलओ उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। सुनवाई केवल असाधारण परिस्थितियों में होगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन कराई जाएगी। ईसीआईनेट पर चुनाव आयोग ने बताया है कि ईआरओ के आदेश के बिना किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ा या हटाया नहीं जाता। नियमों के अनुपालन की जांच के लिए आईआईटी और आईआईएससी के विशेषज्ञों वाली समिति गठित की गई है।

गोवा के 97 मतदाताओं के मामले पर आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि छूट गए 97 मतदाताओं में से 88 पहले से मतदाता सूची में शामिल थे, छह विदेश में थे और तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे। पश्चिम बंगाल की अपीलों पर चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने के खिलाफ अपीलें सीईओ, पश्चिम बंगाल के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत दायर की थीं। ईसीआई ने कहा कि ये मामले आयोग के समक्ष नहीं रखे गए थे।

चुनाव आयोग ने याचिका की सुनवाई-योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीईसी को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी है। आयोग ने आंतरिक दस्तावेज मीडिया में जारी करने से इनकार किया। ईसीआई ने कहा कि उसने किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही उसे जारी करने की अनुमति दी।

आयोग ने ईवीएम से जुड़ी याचिकाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि ईवीएम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई बार खारिज कर चुका है। आयोग ने विस्तृत जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी और कहा कि दशहरा अवकाश के कारण आयोग ने फिलहाल संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है और सुप्रीम कोर्ट से विस्तृत, बिंदुवार जवाब देने की अनुमति मांगी है।

चुनाव आयोग के कामकाज और विभिन्न राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दायर लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक साथ हलफनामा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया है।

ईसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में सीईसी पर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि याचिका सिर्फ एक खबर पर आधारित है। सीईसी ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसले लेने की खबर को गलत बताया गया है।

हलफनामे में कहा गया है कि एसआईआर के तीनों आदेश (जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026) आयोग के सर्वसम्मत फैसले हैं। हलफनामे में कहा गया है कि फाइल सिस्टम के मुताबिक फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। नोट या सवाल फैसले नहीं होते हैं।

हलफनामे के मुताबिक, 28 जुलाई का ऑर्डर एडिशनल सेक्रेटरी ने जारी किया था। दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को लिखा। 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ। हलफनामे में बताया गया है कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसे सिर्फ सरकार बदल सकती है। एसआईआर डिक्लेरेशन अलग है। 21 अक्टूबर से ऑनलाइन फॉर्म भी दो हिस्सों फॉर्म 6 और डिक्लेरेशन में बंटेगा। 

(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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रमेश कुमार

रमेश कुमार - सीनियर कंटेंट राइटर

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