बहुमत से दूर नेतन्याहू और विपक्ष: क्या इज़राइल में पलटेगी बाजी या होंगे नए चुनाव?

Nov 01, 2026 - 14:25
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बहुमत से दूर नेतन्याहू और विपक्ष: क्या इज़राइल में पलटेगी बाजी या होंगे नए चुनाव?
बहुमत से दूर नेतन्याहू

इजरायल, इजरायल में कड़े मुकाबले वाले संसदीय चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वोटों की गिनती के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी 'नेसेट' (इजरायली संसद) में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, उनके पास अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं है।

इसके चलते अब जटिल गठबंधन वार्ता का दौर शुरू हो चुका है, जहाँ अरब पार्टियां 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकती हैं, जबकि विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट के सामने भी बड़े राजनीतिक फैसले लेने की चुनौती है।

सर्वे के आंकड़े: क्या चाहती है जनता?

हिब्रू यूनिवर्सिटी के 'अकॉर्ड सेंटर' द्वारा जारी एक सर्वे के अनुसार, विपक्षी दलों के समर्थकों के बीच विकल्पों को इस प्रकार समर्थन मिला है:

61% समर्थन: आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन में मंसूर अब्बास की 'राआम' (Ra'am) पार्टी को शामिल करने के पक्ष में।20% समर्थन: दोबारा चुनाव (मध्यावधि/नए चुनाव) कराने के पक्ष में।12% समर्थन: नेतन्याहू के साथ रोटेशन (बारी-बारी से) सरकार बनाने के पक्ष में।7% समर्थन: अति-रूढ़िवादी (कट्टरपंथी पार्टियों) के साथ गठबंधन के पक्ष में।(आंकड़ों के लिहाज से विपक्ष की 48 सीटों में 'राआम' की 8 और 'जॉइंट लिस्ट' की 11 सीटें मिलने पर यह कुल 67 सीटें यानी बहुमत से काफी अधिक हो जाता है।)

इजरायल में अगली सरकार बनने के मुख्य रास्ते

पहला विकल्प (नेतन्याहू के नेतृत्व में दक्षिणपंथी गठबंधन): यदि नेतन्याहू विपक्षी खेमे के दक्षिणपंथी दलों को तोड़कर अपने साथ मिलाने में कामयाब हो जाते हैं, तो वह बहुमत की सरकार बना सकते हैं।

दूसरा विकल्प (आइसेनकोट के नेतृत्व में गठबंधन + अरब समर्थन): यदि विपक्षी गुट में 'जॉइंट लिस्ट' और 'राआम' पार्टियां शामिल हो जाती हैं, तो 67 सीटों के साथ आइसेनकोट के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बन सकती है।

तीसरा विकल्प (अल्पमत सरकार): यदि अरब सांसद गठबंधन में सीधे शामिल न हों, लेकिन शुरुआती विश्वास मत के लिए कम से कम 6 अरब सांसदों का समर्थन मिल जाए, तो अल्पमत सरकार भी बनाई जा सकती है। नेतन्याहू और आइसेनकोट के संयुक्त नेतृत्व में 'लिकुड', 'यशार', 'ब्याचाद' और 'यिसराएल बेतेनु' मिलकर 66 सीटों वाली सरकार बना सकते हैं (हालांकि इसके लिए आइसेनकोट को अपना पुराना रुख बदलना होगा)। यदि कोई सहमति नहीं बनती है, तो नए चुनाव कराए जा सकते हैं, जिसमें नेतन्याहू तब तक 'कार्यवाहक प्रधानमंत्री' बने रहेंगे।

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प्रियांशी सिरोही

प्रियांशी सिरोही - ( कंटेंट राइटर )

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