आईटीबीपी स्थापना दिवस: 3,488 किमी लंबी LAC के प्रहरियों को राष्ट्र का सलाम
नई दिल्ली। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 65वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सशस्त्र बलों के शीर्ष अधिकारियों ने बल के जवानों, अधिकारियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दी हैं। नेताओं ने शून्य से नीचे के तापमान और दुर्गम पहाड़ियों में देश की सुरक्षा में तैनात आईटीबीपी के 'हिमवीरों' के अदम्य साहस, समर्पण और बलिदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
शीर्ष नेतृत्व ने सराहा 'हिमवीरों' का पराक्रम
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि आईटीबीपी के जवानों ने अपने असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प से खुद को साबित किया है। उनकी निस्वार्थ सेवा और सर्वोच्च बलिदान पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत हैं।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: रक्षा मंत्री ने कहा कि हिमवीर अत्यधिक कठिन जलवायु परिस्थितियों में सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ वामपंथी उग्रवाद विरोधी अभियानों और आंतरिक सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनका पेशेवर रवैया और कर्तव्यनिष्ठा देश की सर्वोत्तम परंपराओं को दर्शाती है।
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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू: उन्होंने बल के आदर्श वाक्य 'शौर्य-दृढ़ता-कर्मनिष्ठा' का उल्लेख करते हुए जवानों के त्याग और देशभक्ति को नमन किया।
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भारतीय सेना व सीआरपीएफ: थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ और सीआरपीएफ डीजी जीपी सिंह सहित दोनों बलों के सभी अधिकारियों व जवानों ने आईटीबीपी के गौरवशाली इतिहास और सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा को सलाम किया।
आईटीबीपी: एक नजर में
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स्थापना: भारत-चीन युद्ध के बाद 24 अक्टूबर 1962 को एक विशेष सीमा सुरक्षा बल के रूप में इसकी नींव रखी गई थी।
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कार्यक्षेत्र (LAC सुरक्षा): आईटीबीपी गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है और लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक फैली 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की रक्षा करती है।
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प्रमुख जिम्मेदारियां: सीमा सुरक्षा, घुसपैठ व तस्करी की रोकथाम, अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आपदा राहत एवं बचाव कार्य और देश के विभिन्न हिस्सों में आंतरिक सुरक्षा व नक्सल विरोधी अभियान संभालना।
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