अब भारत का स्वदेशी नाविक सिस्टम होगा मजबूत
अमेरिका के जीपीएस को टक्कर देने की तैयारी! इसरो ने प्रक्षेपित किया एनवीएस-03, अब मजबूत होगा भारत का स्वदेशी नाविक सिस्टम
नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार रात आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के जरिए अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण किया। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम नाविक को मजबूत करना है। इससे देश की विदेशी जीपीएस प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
सेना और सुरक्षा एजेंसियों को मिलेगा फायदा
भारत का नाविक सिस्टम केवल आम नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि सेना और सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके मजबूत होने से मिसाइलों के मार्ग निर्धारण, सैनिकों की स्थिति, लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों की आवाजाही में मदद मिलेगी। किसी युद्ध या आपातकालीन स्थिति में विदेशी नेविगेशन सेवाओं पर निर्भरता भी कम की जा सकेगी।
क्या हैं एनवीएस-03 की खासियतें?
एनवीएस-03 इसरो की दूसरी पीढ़ी की नेविगेशन उपग्रह श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:
- इसमें भारत में विकसित स्वदेशी परमाणु घड़ी लगाई गई है, जो सटीक समय की जानकारी देगी।
- मौजूदा एल-5 और एस-बैंड संकेतों के साथ नया एल-1 संकेत भी जोड़ा गया है।
- स्मार्टफोन और आधुनिक नेविगेशन उपकरणों के साथ इसकी अनुकूलता बेहतर होने की उम्मीद है।
- यह भारत और उसकी सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर बाहर तक नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
- इसके जरिए सटीक स्थान, रास्ते और समय की जानकारी मिल सकेगी।
क्या है भारत का नाविक सिस्टम?
नाविक यानी नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन भारत की अपनी उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली है। यह अमेरिकी जीपीएस की तरह काम करती है। इसके जरिए दो तरह की सेवाएं दी जाती हैं। पहली सेवा आम नागरिकों के लिए है, जबकि दूसरी सुरक्षित और गुप्त संकेतों वाली सेवा सेना तथा अधिकृत सुरक्षा एजेंसियों के इस्तेमाल के लिए है।
जीपीएस पर निर्भरता होगी कम
फिलहाल भारत सहित दुनिया के कई देश अमेरिकी जीपीएस और रूस के ग्लोनास जैसे विदेशी नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। युद्ध या किसी आपातकालीन परिस्थिति में इन सेवाओं की उपलब्धता सीमित होने का खतरा रहता है। ऐसे में एनवीएस-03 का प्रक्षेपण भारत के लिए महत्वपूर्ण है। इससे स्वदेशी नाविक प्रणाली को मजबूती मिलेगी और देश अपनी नेविगेशन जरूरतों के लिए अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा।
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