शांति निर्माण पर यूएन में भारत का पक्ष: अरुण भारती ने दिया राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर जोर
एजेंसी, न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के ईसीओएसओसी (ECOSOC) चैंबर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना आयोग (PBC) और अफ्रीकी संघ शांति व सुरक्षा परिषद (AUPSC) की 9वीं वार्षिक बैठक में भारत का पक्ष मजबूती से रखा गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और बिहार के जमुई से सांसद अरुण भारती ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी देश में स्थायी शांति की स्थापना के लिए 'राष्ट्रीय स्वामित्व' (National Ownership) सबसे अहम सिद्धांत होना चाहिए।
"शांति निर्माण में थोपे गए मॉडल नहीं, राष्ट्रीय सहमति जरूरी": अरुण भारती
सांसद अरुण भारती ने शांति निर्माण प्रक्रियाओं में मेजबान देशों की संप्रभुता और प्राथमिकताओं पर जोर देते हुए भारत का दृष्टिकोण साझा किया:
-
राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान: उन्होंने कहा कि शांति निर्माण की जरूरतें और प्राथमिकताएं तय करने की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल संबंधित देश की सरकार की है।
-
मांग-आधारित सहायता: अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहायता हमेशा मांग-आधारित होनी चाहिए। यह मेजबान देश के अनुरोध और सहमति पर दी जाए, ताकि वह उनके राष्ट्रीय प्रयासों की पूरक बने, न कि उनका विकल्प।
-
संस्थागत साझेदारी: 2025 की शांति निर्माण संरचना समीक्षा के प्रस्तावों का हवाला देते हुए उन्होंने पीबीसी और एयूपीएससी के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और आपसी जनादेशों के सम्मान का आह्वान किया।
समावेशी विकास, महिला-युवा भागीदारी और बेहतर फंडिंग
शांति निर्माण के वित्तपोषण और सामाजिक न्याय पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा:
-
वित्तपोषण में तालमेल: संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण कोष, अफ्रीकी विकास बैंक और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है, ताकि संसाधनों का बिखराव न हो और बाहर से थोपे गए दृष्टिकोणों से बचा जा सके।
-
समावेशी शांति: उन्होंने कहा कि शांति तभी स्थायी हो सकती है जब वह समावेशी हो। संयुक्त विज्ञप्ति में शांति निर्माण प्रक्रियाओं में महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी को मिली मान्यता का उन्होंने स्वागत किया।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और 'वसुधैव कुटुम्बकम्'
अरुण भारती ने बताया कि कैसे डिजिटल तकनीक शासन और शांति को मजबूत कर सकती है:
-
पारदर्शी सेवा वितरण: मानव-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को प्रभावी और पारदर्शी बनाकर जनता का भरोसा बढ़ाती है, जिससे स्थायी शांति की नींव मजबूत होती है। भारत ने आधार, यूपीआई (UPI) और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के जरिए अंतिम व्यक्ति तक कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाकर वैश्विक स्तर पर मिसाल पेश की है।
-
वैश्विक साझेदारी: उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (पूरा विश्व एक परिवार है) के सिद्धांत पर आधारित है। भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के जरिए भारत अपने अफ्रीकी साझेदारों की प्राथमिकताओं और क्षमता निर्माण में पूरा सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)