वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उभरे भारत और पोलैंड: पीएम मोदी ने बताया विकास का केंद्र
एजेंसी,नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता आयोजित हुई। इस बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक रणनीतिक विषयों पर आपसी सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ करने पर पूर्ण सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि वर्ष 2024 में उनके पोलैंड दौरे के समय दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी का स्वरूप दिया गया था, जिसे बीते दो वर्षों में अभूतपूर्व गति मिली है।
साझी मानवीय विरासत और ऐतिहासिक संबंध
प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के ऐतिहासिक व भावनात्मक रिश्तों को स्मरण किया:
द्वितीय विश्व युद्ध की मिसाल: उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड की मित्रता केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता पर आधारित है।
द्वितीय विश्व युद्ध के संकटपूर्ण समय में जामनगर और कोल्हापुर के राजघरानों ने हजारों पोलिश बच्चों और परिवारों को आश्रय देकर अटूट मानवीय संबंध स्थापित किए थे।
विकास के मजबूत आधार: वर्तमान समय में जब विश्व अनिश्चितताओं और तीव्र परिवर्तनों से जूझ रहा है, तब भारत और पोलैंड नवाचार, तकनीक और आर्थिक प्रगति के मजबूत केंद्र बनकर सामने आए हैं।
आर्थिक उपलब्धियां और व्यापार के नए द्वार
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की आर्थिक प्रगति की सराहना की और व्यापारिक संभावनाओं पर बल दिया:
ऐतिहासिक आर्थिक पड़ाव: प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड की अर्थव्यवस्था के दस खरब डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद के पार पहुंचने पर पोलिश प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्होंने भारत की पिछली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की विकास दर का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की आर्थिक मजबूती नए अवसर सृजित कर रही है।
मुक्त व्यापार का लाभ: भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते के प्रभावी होने से भारतीय निर्यातकों के लिए पोलैंड के बाजार में मशीनरी, रसायन, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामान के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं खुलेंगी।
रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्र में साझेदारी
सह-उत्पादन का आह्वान: भारत ने रक्षा निर्माण, अंतरिक्ष विज्ञान और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील व रणनीतिक क्षेत्रों में पोलिश उद्यमों को संयुक्त विकास और सह-उत्पादन के लिए आमंत्रित किया है।
दीर्घकालिक तकनीकी लाभ: आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान और संयुक्त परियोजनाओं से दोनों देशों को दूरगामी लाभ प्राप्त होंगे।
वैश्विक शांति और सुधारों पर साझा दृष्टिकोण
शांति का पक्षधर भारत: यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया के तनाव पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत शांति बहाली के प्रत्येक ईमानदार प्रयास के साथ दृढ़ता से खड़ा है।
संस्थागत सुधार: दोनों देशों ने लोकतांत्रिक मूल्यों और विधिक शासन के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए वैश्विक प्रशासनिक संस्थाओं में समयोचित सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।
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