पाँच दिन चाकरी ,दो दिन स्वरोज़गार

Nov 02, 2026 - 14:52
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 पाँच दिन चाकरी ,दो दिन स्वरोज़गार
ऋषभ कुमार और शशिकांत सिंह

नोएडा।  नोएडा के दो आईटी प्रोफेशनल्स ने कुछ ऐसा कर दिया है कि हफ्ते में पांच दिन लैपटॉप पर नौकरी करने वाले 26 साल के ऋषभ कुमार और शशिकांत सिंह शनिवार-रविवार को मटन का ठेला लगाते हैं। उनके इस छोटे से वीकेंड बिजनेस का नाम है 'लाहम' ।

सिर्फ 35 हजार रुपये से शुरू हुए इस फूड कार्ट ने पहले ही महीने में 6 लाख रुपये का कारोबार किया। खास बात यह है कि दोनों दोस्तों को अपने बिजनेस के लिए 5 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर निवेश का ऑफर भी मिला, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। इस कारोबार में ऋषभ की बहन प्रियंका भी अहम भूमिका निभाती हैं और किचन की पूरी जिम्मेदारी संभालती हैं।

35 हजार रुपये लगाए, पहले महीने में 6 लाख का कारोबार

ऋषभ कुमार और शशिकांत सिंह पहले बेंगलुरु में एक साथ काम करते थे। इसी साल दोनों नोएडा शिफ्ट हुए। ऋषभ को फैशन और फूड बिजनेस में दिलचस्पी थी, लेकिन फैशन बिजनेस शुरू करने के लिए ज्यादा निवेश की जरूरत थी। ऐसे में दोनों ने कम बजट में फूड बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

दोनों ने सावन के महीने में बिजनेस की प्लानिंग शुरू की। इसके लिएचैट जीपीटी और अपने प्रोडक्ट मैनेजमेंट के अनुभव का इस्तेमाल किया। महज 35 हजार रुपये खर्च करके फूड कार्ट, लाइट्स और खाना बनाने का जरूरी सामान खरीदा।

इसके बाद 5 सितंबर को नोएडा के सेक्टर-76 में अपना स्टॉल शुरू कर दिया। शुरुआत में उन्होंने सप्ताह में सिर्फ दो दिन दुकान लगाने का फैसला किया। इसका नतीजा यह रहा कि पहले ही महीने में करीब 6 लाख रुपये का कारोबार हो गया।

सिर्फ 3 घंटे में खत्म हो जाता है 25 किलो मटन

'लाहम' के मटन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्टॉल खुलने के महज तीन घंटे के भीतर पूरा स्टॉक खत्म हो जाता है। कई बार ग्राहकों को टोकन लेकर करीब 45 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है।

ऋषभ और शशिकांत ने पहले दिन सिर्फ 2.5 किलो मटन तैयार किया था और कुल 25 प्लेट बिकी थीं। शुरुआत के 10 मिनट तक कोई ग्राहक नहीं आया। उनका पहला ग्राहक भी नशे में धुत एक शख्स था। उसे मटन का स्वाद इतना पसंद आया कि उसने तुरंत एक और एक्स्ट्रा लार्ज प्लेट ऑर्डर कर दी।

धीरे-धीरे लोगों को इस अनोखे स्वाद की जानकारी मिलने लगी और अब दोनों हर दिन करीब 25 किलो मटन बेच रहे हैं।

एक शनिवार को तीन घंटे में ही पूरा मटन खत्म हो गया। भीड़ में मौजूद एक छोटा बच्चा मटन नहीं मिलने पर लगभग रोने लगा। इस घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस छोटे से फूड कार्ट ने कितनी जल्दी लोगों के बीच अपनी जगह बना ली है।

पेशावर के 'लाहम चरसी' से मिला आइडिया, मालाबार पराठे के साथ परोसते हैं मटन

नोएडा में जहां लिट्टी-चोखा से लेकर सुशी तक कई तरह के फूड ऑप्शन मौजूद हैं, वहीं ऋषभ कुछ अलग पेश करना चाहते थे।

अरबी भाषा में 'लाहम' का मतलब गोश्त होता है। उनका यह फूड कॉन्सेप्ट पाकिस्तान के पेशावर और खैबर पख्तूनख्वा के मशहूर स्ट्रीट फूड 'लाहम चरसी' से प्रेरित है। ऋषभ ने पहली बार इस डिश को हैदराबाद में चखा था।

इसकी खासियत है कि मटन को तेज मसालों और लाल ग्रेवी के बजाय बेहद कम मसालों में पकाया जाता है, ताकि गोश्त का असली स्वाद बरकरार रहे।

इसे केरल के छोटे-छोटे मालाबार कॉइन पराठों के साथ परोसा जाता है। ग्राहकों के लिए इसकी कीमत भी तय की गई है।

लाहम का मेन्यू और कीमत:

हाफ प्लेट (2 पराठे): 159 रुपये
फुल प्लेट (4 पराठे): 279 रुपये
लार्ज प्लेट (6 पराठे): 399 रुपये

मकान मालिक ने रोका, पुलिस परमिशन में भी आई परेशानी

बिजनेस की शुरुआत आसान नहीं रही। शुरुआत में दोनों दोस्त शशिकांत के किराए के फ्लैट में ही मटन पकाते थे। लेकिन कमर्शियल कुकिंग को लेकर मकान मालिक ने आपत्ति जताई। इसके बाद उन्हें क्लाउड किचन का सहारा लेना पड़ा।

एक बार तो दोनों दोस्तों ने 20 किलो मटन तैयार कर लिया था, लेकिन शाम 6 बजे उन्हें मैसेज मिला कि जरूरी अनुमति नहीं होने के कारण वे उस दिन स्टॉल नहीं लगा सकते।

ऐसे में दोनों ने हार मानने के बजाय तुरंत इंस्टाग्राम स्टोरी और व्हाट्सऐप के जरिए टेकअवे ऑर्डर लेना शुरू कर दिया। दिलचस्प बात यह रही कि उस दिन भी उनका पूरा 20 किलो मटन बिक गया।

अब उन्होंने अपना फूड कार्ट एक निजी प्रॉपर्टी पर शिफ्ट कर लिया है, ताकि जगह और अनुमति से जुड़ी परेशानियां कम हों।

बहन प्रियंका संभालती हैं किचन, दोस्तों ने बांटी जिम्मेदारियां

इस बिजनेस की एक खास बात यह भी है कि इसमें परिवार और दोस्तों की पूरी टीम काम करती है।

ऋषभ खुद लीड कुक हैं। इसके साथ ही वह मार्केटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। शशिकांत फाइनेंस, ऑपरेशंस और सामान खरीदने का काम देखते हैं।

ऋषभ की बहन प्रियंका किचन और खाने की तैयारी संभालती हैं। वहीं बचपन के दोस्त अर्पित सिंह ऑपरेशंस और कॉलेज के दोस्त रचित बिलिंग में मदद करते हैं।

दुर्गा पूजा पंडाल और दिल्ली के मशहूर फूड फेस्टिवल 'हॉर्न ओके प्लीज' में जब वीकडेज पर भी स्टॉल लगाना पड़ा, तब प्रियंका ने अकेले कुकिंग की जिम्मेदारी संभाली, क्योंकि दोनों भाई ऑफिस में व्यस्त थे।

रात 2 बजे तक काम, सुबह 7 बजे फिर शुरू होती है तैयारी

नौकरी के साथ बिजनेस संभालना दोनों दोस्तों के लिए आसान नहीं है। शनिवार और रविवार को काम खत्म होते-होते रात के 2 बज जाते हैं। इसके बाद सुबह 7 बजे फिर से तैयारी शुरू करनी पड़ती है।

गोरखपुर के रहने वाले ऋषभ का कहना है कि इस व्यस्तता के चलते उन्हें अपने परिवार और दोस्तों से मिलने तक का समय नहीं मिल पा रहा है।

इसके बावजूद दोनों अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। 35 हजार रुपये से शुरू हुआ उनका यह छोटा सा फूड कार्ट अब लोगों के बीच लोकप्रिय हो चुका है।

5 करोड़ की वैल्यूएशन का ऑफर ठुकराया

'लाहम' की शुरुआती सफलता के बाद दोनों दोस्तों को 5 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर निवेश का प्रस्ताव भी मिला। हालांकि, उन्होंने फिलहाल इस ऑफर को स्वीकार नहीं किया।

दोनों का फोकस अपने प्रोडक्ट और बिजनेस को मजबूत बनाने पर है। उनकी कहानी दिखाती है कि नौकरी के साथ भी एक छोटे आइडिया को कारोबार में बदला जा सकता है।

जहां ज्यादातर लोग वीकेंड पर आराम करना पसंद करते हैं, वहीं ऋषभ और शशिकांत ने शनिवार-रविवार को अपनी कमाई और सपनों का नया रास्ता बना लिया है।

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भूमि चौधरी

भूमि चौधरी - ( कंटेंट राइटर )

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