कैंसर की दवाएं होंगी सस्ती: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया हलफनामा
नई दिल्ली। दवाओं की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण हलफनामा प्रस्तुत किया है। सरकार ने अदालत को अवगत कराया है कि गैर-अनुसूचित श्रेणी की कैंसर दवाओं पर व्यापार मार्जिन (ट्रेड मार्जिन) को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का नीतिगत निर्णय लिया गया है। इस कदम से कैंसर के गंभीर रोगियों को भारी वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ समिति का गठन और रिपोर्ट
व्यापार मार्जिन को नियंत्रित करने की प्रक्रिया को अमली जामा पहनाने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने ठोस कदम उठाए हैं:
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उच्च स्तरीय समिति: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो उन कैंसर रोधी दवाओं की सूची तैयार कर रही है जिन पर यह सीमा लागू की जाएगी।
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समय सीमा: समिति को दस से पंद्रह दिनों के भीतर अपनी अनुशंसा रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
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मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की भूमिका: विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण इस विषय पर विचार कर आवश्यक दिशा-निर्देश और मूल्य सीमाएं जारी करेगा।
मरीजों को 2,500 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत का अनुमान
सरकार का आकलन है कि इस व्यवस्था के लागू होते ही दवाओं के अनावश्यक और अत्यधिक मुनाफे पर प्रभावी रोक लगेगी:
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दामों में भारी कमी: प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने से संबंधित कैंसर दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में 20 से 70 प्रतिशत तक की तेज गिरावट आने का अनुमान है।
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मरीजों को बड़ी राहत: इस नियंत्रण से देशभर के कैंसर रोगियों और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष लगभग 2,500 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष बचत होगी।
अस्पतालों द्वारा अत्यधिक वसूली पर सरकार की चिंता
हलफनामे में केंद्र सरकार ने अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की अत्यधिक कीमतों की समस्या को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है:
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700 प्रतिशत तक का भारी मुनाफा: सरकार ने अदालत में रेखांकित किया कि देश में कई कंपनियां किफायती दरों पर दवाएं बनाती हैं, लेकिन जानकारी के अभाव और अस्पतालों में मोलभाव की गुंजाइश न होने का अनुचित लाभ उठाया जाता है।
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मरीजों की विवशता: कई निजी अस्पताल कैंसर की आवश्यक दवाओं पर सात सौ प्रतिशत तक अधिक कीमत वसूलते हैं, क्योंकि गंभीर स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों के पास सस्ते विकल्पों को खोजने का अवसर नहीं होता। सरकार इस प्रकार की मुनाफाखोरी को समाप्त करने के लिए प्रभावी उपाय तलाश रही है।
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