करवा चौथ पर क्यों होती है केवल चंद्रमा की पूजा? जानें इसके पीछे की पौराणिक मान्यता
एजेंसी, नई दिल्ली,करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा करने के पीछे कई धार्मिक और ज्योतिषीय कारण हैं। इस खबर के अनुसार इसके मुख्य कारण और पौराणिक मान्यताएं नीचे आसान भाषा में दी गई हैं:
शीतलता, प्रेम और शांति के प्रतीक
दांपत्य जीवन में मधुरता: ज्योतिष में चंद्रमा को मन, शीतलता, शांति और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। विवाहित स्त्रियां अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, मिठास और शांति बनाए रखने के लिए चंद्र देव को अर्घ्य देती हैं।
सूर्य और चंद्रमा में अंतर: सूर्य देव को तेज और उग्र माना जाता है, जबकि चंद्रमा को शीतल और शांत। माना जाता है कि चंद्रमा की शीतल किरणें पति-पत्नी के बीच के कलेश और तनाव को दूर कर जीवन में स्थिरता लाती हैं।
अखंड सौभाग्य और रोहिणी नक्षत्र का संयोग
रोहिणी से चंद्र देव का विशेष प्रेम: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र देव अपनी सभी पत्नियों में से 'रोहिणी' से सबसे अधिक प्रेम करते थे। करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बनता है, जिससे इस दिन चंद्रमा का महत्व और बढ़ जाता है।
अखंड सौभाग्य: चंद्रमा को शाश्वत चक्र और पुनर्जन्म से जोड़ा जाता है, इसलिए स्त्रियां इन्हें 'अखंड सौभाग्य' (पति की लंबी उम्र) का प्रतीक मानकर पूजती हैं।
महाभारत काल की पौराणिक कथा
महाभारत काल में जब पांडव संकट में थे, तब भगवान श्रीकृष्ण के परामर्श पर द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा और सफलता के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था।
'करवा चौथ' नाम का अर्थ
करवा: मिट्टी का एक छोटा पात्र।
चौथ: कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि।
इस दिन मिट्टी के करवे में जल भरकर शीतल किरणों वाले चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है, इसीलिए इस पर्व को 'करवा चौथ' कहा जाता है।
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