जावेद अख्तर बोले- तकनीक जरूरी है, लेकिन कला ही इंसान को रोबोट से अलग बनाती है!
एजेंसी, मुंबई: मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को 'लिबरल आर्ट्स' (कला और मानवीय विषयों) के साथ जोड़ने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि तकनीक इंसान की तरक्की के लिए जरूरी है, लेकिन कला ही हमें रोबोट या कंप्यूटर से अलग बनाती है।
इंसान और कंप्यूटर में क्या है फर्क?
आईएएनएस से बातचीत करते हुए जावेद अख्तर ने कहा:
"विज्ञान और तकनीक बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके साथ ही लिबरल आर्ट्स (इतिहास, साहित्य, कविता आदि) की समझ होना भी उतना ही जरूरी है।"
"यही वह फर्क है जो एक इंसान को कंप्यूटर या रोबोट से अलग करता है।"
ज्ञान को अलग-अलग खानों में न बांटें
जावेद अख्तर ने इस बात पर जोर दिया कि लोगों को सिर्फ अपने ही क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए:
विज्ञान छात्रों के लिए: जो लोग विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र से जुड़े हैं, उन्हें भी इतिहास, साहित्य, कविता, चित्रकला और लोक कलाओं की जानकारी होनी चाहिए।
कला छात्रों के लिए: इसी तरह, कला या लिबरल आर्ट्स की पढ़ाई करने वालों को भी विज्ञान की बुनियादी समझ होनी चाहिए। ज्ञान को अलग-अलग हिस्सों में बांटना सही नहीं है।
जावेद अख्तर का शानदार सफर
सलीम-जावेद की जोड़ी: जावेद अख्तर को ऐतिहासिक पटकथा (Screenplay) लेखक जोड़ी 'सलीम-जावेद' के रूप में बड़ी पहचान मिली। इस जोड़ी ने 'जंजीर' (1973), 'दीवार' (1975), 'शोले' (1975) और 'मिस्टर इंडिया' (1987) जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं।
गीतकार के रूप में पहचान: इसके बाद उन्होंने 'सिलसिला', '1942: ए लव स्टोरी', 'बॉर्डर', 'रिफ्यूजी' और 'लगान' जैसी फिल्मों के लिए बेहतरीन गीत लिखे।
सम्मान: सिनेमा और साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 5 नेशनल अवॉर्ड्स के अलावा पद्म श्री (1999) और पद्म भूषण (2007) से सम्मानित किया जा चुका है।
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