29 अक्टूबर का पंचांग
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
नक्षत्र एवं ग्रहों की स्थिति
सूर्य की स्थिति: सूर्य देव तुला राशि और स्वाति नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। (तुला राशि में सूर्य को नीचस्थ माना जाता है; स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता पवन देव और स्वामी राहु हैं)।
चंद्र देव: चंद्र देव पूरे दिन और रात वृषभ राशि में संचार करेंगे, जो कि चंद्रमा की उच्च और अत्यंत शुभ स्थिति मानी जाती है।
प्रमुख योग: गुरुवार रात 12:05 बजे तक परिघ योग रहेगा, जिसके उपरांत शिव योग का आरंभ होगा।
शुभ और कल्याणकारी मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक (दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय)।
अमृत काल: सुबह 8:17 बजे से 9:44 बजे तक (नए व्यापार, निवेश और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए श्रेष्ठ)।
अशुभ समय और यात्रा निषेध
राहुकाल: दोपहर 1:34 बजे से 2:58 बजे तक (नए कार्यों की शुरुआत के लिए वर्जित)।
यमगंड काल: सुबह 6:34 बजे से 7:58 बजे तक (नए कार्य, यात्रा और धन के लेन-देन से बचना चाहिए)।
गुलिक काल: सुबह 9:22 बजे से दोपहर 10:46 बजे तक (इस काल में निवेश, दान या पुराने कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन नए कार्यों से बचें)।
दिशाशूल: गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल रहेगा, अतः इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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