सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसदमहुआ मोइत्रा की याचिका खारिज की
दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की वह याचिका खारिज कर दी है, जिसमें विदेशी और वैकल्पिक निवेश फंडोंके असली मालिकों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई थी।
याचिका में क्या मांग थी?
महुआ मोइत्रा चाहती थीं कि सेबी भारत में निवेश करने वाले विदेशी फंड्स और वैकल्पिक निवेश फंड्स के 'अल्टीमेट बेनिफिशियल ओनर्स' (यानी फंड के असली और अंतिम मालिकों) और उनके निवेश का पूरा विवरण आम जनता के लिए सार्वजनिक करे।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि वर्तमान में ऐसा कोई कानून या नियम नहीं है जो ऐसी जानकारी को सार्वजनिक करना अनिवार्य बनाता हो। इसलिए, कोर्ट कानून के तहत ऐसा कोई आदेश (रिट ऑफ मैंडमस) जारी नहीं कर सकता।
वकीलों की दलीलें:
प्रशांत भूषण (महुआ मोइत्रा के वकील): तर्क दिया कि विदेशी संस्थाओं के जरिए भारतीय बाजार में पैसा आ रहा है, लेकिन असली निवेशकों के बारे में पता न होने से शेयर बाजार में हेरफेर और नियमों के उल्लंघन का खतरा रहता है।तुषार मेहता (सॉलिसिटर जनरल): याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य देश में विदेशी निवेश को रोकना है।
कोर्ट ने क्या रास्ता सुझाया?
हालांकि कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन महुआ मोइत्रा को यह छूट दी है कि वह इस मामले को लेकर सीधे केंद्र सरकार और सेबी के पास संपर्क कर सकती हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेबी और कस्टोडियन के पास इन निवेशकों की जानकारी पहले से होती है जिससे नजर रखी जा सके, लेकिन उसे पूरी तरह सार्वजनिक करने का अभी कोई कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)