शेयर बाजार अपडेट: FPI की बिकवाली जारी, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भारी गिरावट
एजेंसी, नई दिल्ली: कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। विदेशी निवेशकों (FPI) का रुझान लगातार बिकवाली की ओर बना हुआ है और वे भारतीय इक्विटी बाजार से तेजी से पैसे निकाल रहे हैं।
अक्टूबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली
बड़ी निकासी: अक्टूबर महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से कुल 53,337 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं।
आईपीओ में निवेश: हालांकि, इस बिकवाली के बीच एक सकारात्मक बात यह रही कि FPI ने इस दौरान भारतीय आईपीओ बाजार में 5,281 करोड़ रुपये का निवेश भी किया है।
सालभर का आंकड़ा: जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, इस साल अब तक एक्सचेंजों के जरिए FPI की कुल बिकवाली 3,69,164 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। लगातार 10वें हफ्ते FPI शुद्ध बिकवाल (Net Sellers) बने हुए हैं।
बाजार में राहत देने वाले कुछ कारक
अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में की बिकवाली की रफ्तार में थोड़ी कमी आई है, जिसके मुख्य कारण ये रहे:
यूएस बॉन्ड यील्ड में नरमी: अमेरिका में 10-साल की बॉन्ड यील्ड 5.36 प्रतिशत से घटकर लगभग 5 प्रतिशत पर आ गई है।
मजबूत होता रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया मजबूत होकर 94.94 के स्तर पर पहुंच गया है।
कम वैल्यूएशन: लार्ज-कैप शेयरों का वैल्यूएशन आकर्षक होना भी निवेशकों को लुभा रहा है।
मिड-कैप और स्मॉल-कैप में भारी गिरावट
इस हफ्ते व्यापक बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली:
मिड-कैप और स्मॉल-कैप: निफ्टी मिड-कैप 100 में 5.6% और निफ्टी स्मॉल-कैप 100 में 7.3% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
लार्ज-कैप की मजबूती: इसके मुकाबले निफ्टी 50 ने काफी मजबूती दिखाई और इसमें केवल 2.35% की ही गिरावट आई।
घरेलू निवेशकों (DII) का सहारा: लार्ज-कैप शेयरों के संभलने की मुख्य वजह घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) द्वारा लगातार की जा रही खरीदारी है, जिनके पास पर्याप्त फंड मौजूद है।
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