पंजाब: जलालाबाद में कांग्रेस को बड़ा झटका, पूर्व विधायक रमिंदर आवला अकाली दल में गए
चंडीगढ़। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को सीमावर्ती मालवा क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जलालाबाद से पूर्व विधायक रमिंदर सिंह आवला ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का दामन थाम लिया है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उनका अकाली दल में औपचारिक रूप से स्वागत किया और इसे सीमावर्ती क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत करने वाला कदम बताया।
सुखबीर बादल ने किया स्वागत, 2027 के लिए सीमावर्ती क्षेत्र मजबूत करने का दावा
पार्टी में शामिल होने और राजनीतिक समीकरणों से जुड़े मुख्य बिंदु:
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सुखबीर सिंह बादल का बयान: सुखबीर बादल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि जलालाबाद क्षेत्र ने उन्हें तीन बार सेवा का अवसर दिया है और अकाली सरकारों के दौरान वहां अभूतपूर्व विकास हुआ। उन्होंने भरोसा जताया कि आवला के पार्टी में आने से जलालाबाद सहित पूरे बॉर्डर बेल्ट में शिरोमणि अकाली दल को नई मजबूती मिलेगी, जिससे 2027 में पार्टी की जीत की राह आसान होगी।
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2019 में अकाली गढ़ में रचा था इतिहास: रमिंदर सिंह आवला ने वर्ष 2019 के जलालाबाद उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर शिअद उम्मीदवार को लगभग 16 हजार मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। इस जीत के साथ उन्होंने 17 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस सीट पर कांग्रेस की वापसी कराई थी।
बूथ कार्यकर्ता से लेकर एआईसीसी तक का लंबा सफर
रमिंदर सिंह आवला का राजनीतिक कद और संगठनात्मक अनुभव:
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कांग्रेस में निभाईं अहम जिम्मेदारियां: आवला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बूथ स्तर के कार्यकर्ता के रूप में की थी। इसके बाद वे पंजाब यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष, पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के महासचिव और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव रहे, जहां उन्हें कर्नाटक राज्य का संगठनात्मक प्रभार सौंपा गया था।
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कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान: मालवा के प्रमुख सीमावर्ती क्षेत्र में मजबूत जनाधार और सांगठनिक पकड़ रखने वाले नेता के शिअद में जाने से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस को स्थानीय स्तर पर बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
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