यूरोप को पीयूष गोयल की खरी-खरी: 'भरोसा ही सबसे बड़ी मुद्रा, स्टील टैक्स से खुद का नुकसान'
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ को आगाह किया है कि कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) और इस्पात आयात पर 50 प्रतिशत तक के आयात शुल्क जैसे संरक्षणवादी कदम स्वयं यूरोप की अर्थव्यवस्था, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के लिए हानिकारक सिद्ध होंगे। 'बर्लिन ग्लोबल डायलॉग 2026' में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने रेखांकित किया कि समकालीन वैश्विक व्यापार में 'भरोसा' ही सबसे मूल्यवान और सुदृढ़ मुद्रा है।
यूरोपीय नीतियों के दुष्परिणामों पर स्पष्ट संदेश
यूरोपीय नीतियों पर टिप्पणी करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे कड़े प्रतिबंधों से यूरोपीय बाजार में चुनौतियां ही बढ़ेंगी:
महंगाई और प्रतिस्पर्धा का संकट: गोयल के अनुसार, सीबीएएम और 50% तक के भारी स्टील आयात शुल्क से यूरोप में जीवन-यापन की लागत बढ़ेगी, आम नागरिक महंगाई से जूझेंगे और स्वयं यूरोपीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे।
साझा साझेदारी का अवसर: उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और यूरोपीय संघ के पास आपसी विश्वास, प्रतिस्पर्धात्मकता और पूरक क्षमताओं के आधार पर एक मजबूत, टिकाऊ आर्थिक साझेदारी गढ़ने का उत्कृष्ट अवसर है।
भारत-जर्मनी व्यापार: 310 अरब यूरो तक पहुंचाने का विज़न
बर्लिन में उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने द्विवार्षिक व दीर्घकालिक व्यापार संभावनाओं का खाका प्रस्तुत किया:
दस गुना विस्तार की संभावना: वर्तमान में भारत और जर्मनी के बीच लगभग 31 अरब यूरो का द्विपक्षीय व्यापार है, जिसे आपसी सहयोग, नई प्रौद्योगिकियों और संयुक्त उत्पाद विकास के माध्यम से 310 अरब यूरो तक पहुंचाया जा सकता है।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व: गोयल 22 से 27 अक्टूबर तक जर्मनी और नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर हैं, जहां उनके साथ 100 से अधिक भारतीय उद्योगों और स्टार्टअप्स का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है।
जर्मनी का रुख: जर्मनी की आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे ने लालफीताशाही समाप्त करने और द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान स्तर से दोगुना करने पर बल दिया।
भारत-ईयू एफटीए: वर्ष के अंत तक समझौते की उम्मीद
व्यापार वार्ता को लेकर उन्होंने अत्यंत सकारात्मक संकेत दिए:
गेम चेंजर एफटीए: भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस वर्ष के अंत तक हस्ताक्षरित होने की प्रबल संभावना है, जिसे अगले चार से पांच महीनों में लागू किया जा सकता है।
रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग: दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला जैसे भविष्य के प्रमुख क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर विस्तृत सहमति बनी।
शॉर्ट एवं आकर्षक हेडलाइंस
- पीयूष गोयल की यूरोप को दो टूक: सीबीएएम और 50% स्टील शुल्क से खुद यूरोप को होगा नुकसान
- ग्लोबल ट्रेड में भरोसा ही सबसे बड़ी मुद्रा: बर्लिन में बोले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
- भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता जल्द: वर्ष के अंत तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद
- 31 अरब से 310 अरब यूरो तक जा सकता है भारत-जर्मनी व्यापार: पीयूष गोयल
- संरक्षणवादी नीतियों से बढ़ेगी महंगाई: यूरोपीय संघ को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की खरी-खरी
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