खेती के साथ सौर ऊर्जा से बढ़ेगी किसानों की कमाई, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल: पीएम मोदी
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को जोड़ने वाली एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक को किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण समृद्धि को मजबूत करने का अहम माध्यम बताया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शिवराज सिंह चौहान के एक लेख को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तकनीक से किसानों को अतिरिक्त आय मिल सकती है, ऊर्जा लागत घट सकती है और फसल उत्पादकता को बढ़ावा मिल सकता है।
एक ही जमीन पर खेती और बिजली उत्पादन की सुविधा
केंद्रीय मंत्रियों ने अपने लेख में बताया कि एग्रीवोल्टाइक्स को एग्रीपीवी भी कहा जाता है। इस तकनीक के जरिए किसान एक ही जमीन पर खेती जारी रखने के साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन भी कर सकते हैं। इससे उनकी आय के स्रोत बढ़ेंगे और कृषि क्षेत्र की अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक मजबूती मिल सकती है।
छोटे और सीमांत किसानों के लिए बढ़ेंगे अवसर
लेख के अनुसार, भारत में लगभग 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत श्रेणी में आते हैं। एग्रीवोल्टाइक्स मॉडल उन्हें कृषि उपज के साथ स्वच्छ ऊर्जा से भी कमाई करने का अवसर दे सकता है। बिजली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने के अलावा इससे डीजल और खरीदी गई बिजली पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण में मिल सकता है स्थान
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री-कुसुम योजना के आगामी चरण में एग्रीवोल्टाइक्स को विशेष स्थान देने की तैयारी है। इससे कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने और सिंचाई के सौरकरण के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
फसलों को मौसम की मार से बचाने में मिलेगी मदद
मंत्रियों ने बताया कि एग्रीवोल्टाइक्स से खेतों में सूक्ष्म जलवायु तैयार करने में मदद मिल सकती है। इससे फसलों को अत्यधिक गर्मी, सूखे, तेज सौर विकिरण और ओलावृष्टि जैसी परिस्थितियों से सुरक्षा मिल सकती है। हालांकि, इस मॉडल की सफलता के लिए उपयुक्त फसलों का चयन, पर्याप्त सिंचाई, पोषक तत्वों का उचित प्रबंधन और खेती के लिए पर्याप्त सूर्य प्रकाश सुनिश्चित करने वाले डिजाइन जरूरी हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर
एग्रीवोल्टाइक्स के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। सौर संयंत्रों की स्थापना, रखरखाव और उनसे जुड़ी कृषि सेवाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है।
सफल क्रियान्वयन के लिए समन्वय जरूरी
केंद्रीय मंत्रियों ने अपने लेख में कहा कि एग्रीवोल्टाइक्स को सफल बनाने के लिए कृषि और ऊर्जा विभागों, राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों तथा स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
गौरतलब है कि भारत 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में सातवें एग्रीवोल्टाइक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस की मेजबानी कर रहा है। इस सम्मेलन की थीम 'पावरिंग द ग्लोबल साउथ' रखी गई है।
एजेंसी
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