तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप: 16 लोगों की मौत, 32 घायल और 300 से अधिक मकान धराशायी
एजेंसी, ल्हासा। तिब्बत में गुरुवार को आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन विभाग के अनुसार, इस भीषण प्राकृतिक आपदा में 16 लोगों की जान चली गई, जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। घायलों में से 11 की स्थिति अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। तीव्र झटकों के कारण तीन सौ से अधिक मकान पूरी तरह ढह गए हैं।
युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाया जा रहा है:
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सुरक्षा बलों की तैनाती: मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मियों और लगभग 350 दमकल व बचाव कर्मियों को केंद्र वाले इलाकों में भेजा गया है।
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नुकसान का आकलन: प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाइयां और अस्थाई आश्रय पहुंचाया जा रहा है, जबकि संपत्तियों के नुकसान का विस्तृत विवरण जुटाया जा रहा है।
भूकंप का केंद्र और तीव्रता
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गहराई और दूरी: भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह भूकंप पृथ्वी की सतह से 173 किलोमीटर की गहराई पर आया। इसका मुख्य केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था।
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पहले के झटके: इससे पहले सितंबर माह में भी क्षेत्र में 5.0 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था, जबकि जनवरी 2025 में आए भीषण भूकंप में 120 से अधिक नागरिकों की जान गई थी।
प्राकृतिक आपदाओं से जूझता पठारी क्षेत्र
भूवैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने इस क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता पर चिंता जताई है:
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मौसम चक्र और पिघलते हिमनद: विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, तापमान में निरंतर वृद्धि और तेजी से पिघलते ग्लेशियरों के कारण तिब्बत के पठारी इलाके में प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम लगातार बढ़ रहा है।
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बाढ़ और हिमस्खलन की मार: हालिया भूकंप से पहले अगस्त में नेपाल-तिब्बत सीमा पर बड़े हिमस्खलन और भीषण जलप्रलय की घटनाएं हुई थीं, जिन्होंने भारी तबाही मचाते हुए बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया था।
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