मेघालय में बड़ा राजनीतिक उलटफेर
मेघालय, राजधानी दिल्ली से लेकर पूर्वोत्तर के राज्य मेघालय तक सियासत गरमाई हुई है। मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी में भारी टूट देखने को मिली है। पार्टी के 12 में से 11 विधायकों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है, जिससे इस क्षेत्रीय दल का वजूद लगभग बिखर गया है।
विधायकों ने थामा बीजेपी और एनपीपी का दामन
दलबदल कानून के तहत (दो-तिहाई से अधिक विधायक होने के कारण यह वैध है) इन 11 बागी विधायकों में से:
8 विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है।
3 विधायकों ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी का दामन थाम लिया है।
यूडीपी चीफ का इस्तीफा और सरकार पर असर
पार्टी में हुई इस बगावत के बाद यूडीपी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री मेटबाह लिंगदोह पार्टी में अकेले विधायक बच गए हैं। घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने 31 अक्टूबर 2026 को अपने कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, इस उठापटक से मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की सरकार को कोई खतरा नहीं है।
मेघालय में मजबूत हुई बीजेपी और एनपीपी
इस राजनीतिक उलटफेर से राज्य के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं:
भाजपा की स्थिति: मेघालय विधानसभा में बीजेपी के पास पहले सिर्फ 2 विधायक थे, लेकिन यूडीपी के 8 विधायकों के शामिल होने से अब उनकी संख्या बढ़कर 10 हो गई है। इसके साथ ही बीजेपी अब सरकार में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है।यूडीपी के 3 विधायकों के आने से 60 सदस्यीय विधानसभा में एनपीपी की सीटें 33 से बढ़कर 36 हो गई हैं। अब मुख्यमंत्री संगमा को सरकार चलाने के लिए किसी अन्य दल की बैसाखी की जरूरत नहीं है, क्योंकि उनके पास अपने दम पर पूर्ण बहुमत (31 का आंकड़ा) आ गया है।
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