भारत-स्वीडन साझेदारी: 2030 तक व्यापार और निवेश दोगुना करने का बड़ा लक्ष्य
एजेंसी, नई दिल्ली। भारत और स्वीडन ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार और निवेश को दोगुना करने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। स्वीडन में भारत के राजदूत अनुराग भूषण ने बताया कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), नई तकनीकें और नवाचार दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
रणनीतिक साझेदारी के चार मुख्य आधार
राजदूत के अनुसार, मई 2026 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई बैठक में इस साझेदारी को मजबूत रूप दिया गया था। इसके तहत चार मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:
आर्थिक सहयोग: व्यापार और पूंजी निवेश को वर्ष 2030 तक दोगुना करना।
सुरक्षा व्यवस्था: रणनीतिक और रक्षा तालमेल को बढ़ावा देना।
उभरती तकनीकें: आधुनिक वैज्ञानिक शोध और डिजिटल समाधानों को साझा करना।
आपसी जन-संपर्क: दोनों देशों के नागरिकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के बीच संपर्क को गहरा करना।
तकनीक और नवाचार गलियारा (कॉरिडोर)
दोनों देशों के बीच प्रस्तावित प्रौद्योगिकी गलियारा सहयोग के नए द्वार खोलेगा:
क्षमता और बाजार का मेल: स्वीडन के पास उच्च स्तरीय तकनीकी विशेषज्ञता है, जबकि भारत के पास विशाल प्रतिभा, बड़ा उपभोक्ता बाजार और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था उपलब्ध है।
गोथेनबर्ग की भूमिका: स्वीडन का गोथेनबर्ग शहर तकनीकी अनुसंधान का बड़ा केंद्र बन चुका है, जो भारतीय कंपनियों और नए उद्यमों (स्टार्टअप्स) के साथ सहयोग का मुख्य केंद्र बनेगा।
भविष्य की तकनीकें: इस पहल के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत डिजिटल ढांचे और छठी पीढ़ी (6G) संचार तकनीक पर संयुक्त अनुसंधान और निवेश को गति दी जाएगी।
'मेक इन इंडिया, मेक विद स्वीडन'
कंपनियों की बढ़ती संख्या: भारत में कार्यरत स्वीडिश कंपनियों की संख्या पिछले एक वर्ष में 275 से बढ़कर लगभग 300 तक पहुंच गई है।
साझा विनिर्माण: स्वीडन के आधुनिक नवाचार को भारत की विनिर्माण क्षमता के साथ जोड़कर औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
भविष्य की योजनाएं: वर्ष 2027 में भारत में आयोजित होने वाला द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन दोनों देशों के बीच वर्ष 2047 तक के दीर्घकालिक आर्थिक और तकनीकी संबंधों की रूपरेखा तैयार करेगा।
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