शारदीय नवरात्रि: महाष्टमी और महानवमी की तिथियों को लेकर असमंजस दूर, जानें कब होगी किस देवी की पूजा और कन्या पूजन
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इन दिनों पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बार नवरात्रि के अंतिम दिनों यानी महाष्टमी और महानवमी की तिथियों को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंचांग और उदया तिथि के नियमों को स्पष्ट करते हुए आइए जानते हैं कि किस दिन कौन सा पर्व मनाया जाएगा और कन्या पूजन का सही समय क्या है।
19 अक्टूबर को एक ही दिन पड़ेंगी दोनों तिथियां
पंचांग के अनुसार, इस बार 19 अक्टूबर, सोमवार को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियां पड़ रही हैं।
अष्टमी तिथि: 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक विद्यमान रहेगी।
नवमी तिथि: इसके तुरंत बाद यानी सुबह 10:51 बजे के बाद नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी।
चूंकि 19 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए सनातन धर्म के उदया तिथि के नियम के अनुसार महाष्टमी का पर्व 19 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।
किस दिन होगी किस देवी की पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के इन विशेष दिनों में देवियों के स्वरूपों की आराधना का विशेष महत्व है:
महाष्टमी (19 अक्टूबर): इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। साधक इस दिन अपने घरों और मंदिरों में मां महागौरी की विधि-विधान से आराधना करते हैं।
महानवमी: अष्टमी तिथि समाप्त होने के बाद नवमी तिथि शुरू होगी, जिसमें मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
कन्या पूजन और हवन का महत्व
शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का कन्या पूजन और हवन के लिए विशेष धार्मिक महत्व होता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और कुलदेवी-देवता के विधान के अनुसार अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन संपन्न करते हैं।
भद्रा का साया: 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 29 मिनट से शाम 9 बजकर 43 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।
सर्वश्रेष्ठ समय: उदया तिथि और पंचांग की गणना को देखते हुए 19 अक्टूबर का दिन महाष्टमी और महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन के लिए अत्यंत उत्तम और फलदायी रहेगा।
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