24 अक्टूबर का पंचांग
एजेंसी, नई दिल्ली। सनातन परंपरा में किसी भी मांगलिक अनुष्ठान, नए उद्यम के आरंभ, यात्रा अथवा पूंजी निवेश से पूर्व पंचांग के विश्लेषण की गहरी महत्ता है। पंचांग सौर, चंद्र और विभिन्न ग्रहों की गति पर आधारित समय गणना की वैदिक पद्धति है। 24 अक्टूबर 2026, शनिवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि दोपहर 1:37 बजे तक रहेगी, जिसके उपरांत चतुर्दशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शनिवार को सूर्योदय प्रातः 6:31 बजे तथा सूर्यास्त सायं 5:50 बजे होगा।
नक्षत्र एवं ग्रहों की स्थिति
सूर्य की स्थिति: सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में विद्यमान रहेंगे। स्वाति नक्षत्र के अधिष्ठाता पवन देव और स्वामी राहु हैं। इसके साथ ही सूर्य तुला राशि में गोचरस्थ रहेंगे, जिसे ज्योतिष शास्त्र में सूर्य की नीच स्थिति माना जाता है। ऐसे में आत्मविश्वास बनाए रखने और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।
चंद्र देव: चंद्र देव मीन राशि में गोचर करेंगे, जिससे मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
प्रमुख योग: शनिवार रात्रि 8:00 बजे तक व्याघात योग रहेगा, जिसके उपरांत हर्षण योग का आरंभ होगा।
शुभ और कल्याणकारी मुहूर्त
दिन के दौरान शुभ व मंगलकारी कार्यों के संपादन हेतु उत्तम समय उपलब्ध रहेगा:
अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:48 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक फलदायी समय माना जाता है, जिसमें किए गए कार्यों के दोष स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
अमृत काल: सायं 3:50 बजे से 5:23 बजे तक अमृत काल की अवधि रहेगी। यह समय नवीन व्यापार, धार्मिक अनुष्ठान और महत्वपूर्ण यात्राओं के आरंभ के लिए अत्यंत श्रेयस्कर माना गया है।
अशुभ समय और यात्रा निषेध
विशिष्ट मुहूर्तों के दौरान नए कार्यों और यात्राओं को टालने की सलाह दी गई है:
राहुकाल: प्रातः 9:21 बजे से 10:46 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस समयावधि में किसी भी नए कार्य का श्रीगणेश करने से बचना चाहिए।
यमगंड काल: दोपहर 1:35 बजे से 3:00 बजे तक यमगंड काल रहेगा, जिसमें नए अनुबंध और धन के बड़े लेन-देन से परहेज उचित है।
गुलिक काल: प्रातः 6:31 बजे से 7:56 बजे तक गुलिक काल प्रभावी रहेगा।
दिशाशूल: शनिवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, अतः इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
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