परमाणु ताकत में पाकिस्तान से आगे निकला भारत

सिपरी ईयरबुक 2026 के हवाले से भारत के पास 190 और पाकिस्तान के पास 170 परमाणु वॉरहेड्स होने का दावा। रूस और अमेरिका के पास सबसे बड़ा परमाणु भंडार, वैश्विक हथियारों की होड़ पर चिंता।

Jun 09, 2026 - 11:05
Updated: 7 days ago
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परमाणु ताकत में पाकिस्तान से आगे निकला भारत
ये है भारत की अग्नि मिसाइल जो कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. 

- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट का दावा।

नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और परमाणु हथियारों की नई होड़ के बीच स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की कथित 'सिपरी ईयरबुक 2026'  के आंकड़ों ने नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया है कि भारत का परमाणु हथियार भंडार 2025 के 180 से बढ़कर 2026 में 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है, जबकि पाकिस्तान के पास करीब 170 वॉरहेड्स हैं। वहीं, रूस और अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्तियां बने हुए हैं। रिपोर्ट में वैश्विक परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण, हाई ऑपरेशनल अलर्ट पर रखे गए वॉरहेड्स और कमजोर पड़ते हथियार नियंत्रण समझौतों को लेकर चिंता जताई गई है।

इस बढ़ोतरी के साथ ही भारत रणनीतिक रूप से अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से काफी आगे निकल गया है, जिसकी परमाणु क्षमता इस दौरान बिना किसी बदलाव के 170 वॉरहेड्स पर ही रुकी हुई है। सिपरी की यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारत तेजी से और बहुत ही परिपक्वता के साथ अपनी रणनीतिक क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

भारत की छलांग और पाकिस्तान की स्थिरता

भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने परमाणु बलों और मिसाइल डिलीवरी सिस्टम को लगातार आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन संख्या बल के मामले में भारत अब स्पष्ट बढ़त बना चुका है। जहां भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं। वहीं, पाकिस्तान के पास केवल 170 वॉरहेड्स हैं। रिपोर्ट में भारत को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और ऑपरेशनल शिफ्ट का जिक्र किया गया है। भारत और चीन जैसे उभरते हुए परमाणु संपन्न देश अब शांति काल के दौरान भी अपनी मिसाइलों पर छोटी संख्या में परमाणु वॉरहेड तैनात कर सकते हैं। यह भारत की ऑपरेशनल रेडीनेस में आए एक बड़े बदलाव को दर्शाता है।

मामूली गिरावट के बीच आधुनिकीकरण की आंधी

यदि हम पूरी दुनिया के स्तर पर देखें, तो सिपरी का अनुमान है कि जनवरी 2026 तक दुनिया का कुल परमाणु भंडार 12187 वॉरहेड्स था। अगर इसकी तुलना एक साल पहले यानी 2025 से की जाए, तो तब यह संख्या 12241 थी। कुल संख्या में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट भ्रामक हो सकती है।

देश अपने पुराने और सेवामुक्त हो चुके परमाणु हथियारों को नष्ट करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं। नए, अधिक घातक परमाणु प्रणालियों की तैनाती को तेज कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में यह ट्रेंड पूरी तरह पलट सकता है और कुल संख्या फिर से बढ़ सकती है।

इस समय दुनिया भर के कुल 12,187 परमाणु हथियारों में से लगभग 9,745 वॉरहेड्स को सैन्य भंडारों में संभावित उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है। इनमें से लगभग 4,012 वॉरहेड्स को मिसाइलों और लड़ाकू विमानों पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा चुका है।

सबसे डराने वाली बात यह है कि दुनिया भर में करीब 2,100 से 2,200 परमाणु वॉरहेड्स को 'हाई ऑपरेशनल अलर्ट' पर रखा गया है, यानी ये वो हथियार हैं जिन्हें महज कुछ ही मिनटों के आदेश पर दागा जा सकता है। इस श्रेणी में सबसे ज्यादा हथियार रूस और अमेरिका के पास हैं।

कौन सा देश है किस पायदान पर?  

रूस: दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना हुआ है, जिसके पास कुल 5420 वॉरहेड्स का विशाल भंडार है।

अमेरिका: इस सूची में दूसरे स्थान पर है, जिसके पास वर्तमान में 5,042 वारहेड्स मौजूद हैं।

चीन:  चीन का परमाणु भंडार 600 से बढ़कर 620 वॉरहेड्स हो गया है।

फ्रांस: फ्रांस ने अपने भंडार में सबसे तेज बढ़ोतरी करते हुए इसे 290 से सीधे 370 वॉरहेड्स तक पहुंचा दिया है।

ब्रिटेन: अपनी रणनीतिक क्षमता को स्थिर रखा है। उसके पास वर्तमान में 225 वॉरहेड्स हैं।

इजरायल:  इजरायल का अनुमानित परमाणु भंडार बिना किसी बदलाव के 90 वॉरहेड्स पर ही बना हुआ है।

उत्तर कोरिया: उत्तर कोरिया भी लगातार घातक हथियार बना रहा है। उसका भंडार 50 से बढ़कर 60 वॉरहेड्स हो गया है।

दुनिया के ये सभी नौ देश (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजरायल) अपने परमाणु शस्त्रागार को नया रूप दे रहे हैं। कई नई परमाणु-सक्षम प्रणालियों को सेना में शामिल कर रहे हैं। सिपरी के निदेशक करीम हग्गाग ने इस पूरी स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के उपकरण के रूप में परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता वैश्विक शांति के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। सैन्य प्रौद्योगिकी में नए विकास, वैश्विक स्तर पर हथियारों के नियंत्रण के समझौतों का कमजोर होना और महाशक्तियों के बीच बढ़ती राजनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्विता ने दुनिया को एक बेहद खतरनाक चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।

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