IT Rules Amendment 2026: एआई डीपफेक पर भारत सरकार का कड़ा रुख; 3 घंटे के भीतर कंटेंट हटाने का नियम लागू
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने IT नियम 2021 में बड़ा संशोधन किया है। नए नियमों के तहत सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए एआई-जनरेटेड कंटेंट (डीपफेक, सिंथेटिक ऑडियो, वीडियो) पर दृश्यमान लेबल और ट्रेस करने योग्य मेटाडेटा लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, गैर-कानूनी या भ्रामक डीपफेक सामग्री को हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर महज 3 घंटे कर दी गई है।
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनने वाले फर्जी वीडियो, ऑडियो और भ्रामक तस्वीरों (Deepfakes) पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन करते हुए नए और कड़े प्रावधान लागू कर दिए हैं।
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर फैलने वाली डिजिटल धोखाधड़ी, अनधिकृत प्रतिरूपण (Impersonation) और फर्जी खबरों से नागरिकों की सुरक्षा करना है।
नए एआई नियमों के मुख्य बिंदु (Key Changes)
-
3 घंटे में हटाना होगा कंटेंट (3-Hour Takedown Window): अब तक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के पास शिकायत मिलने के बाद गैर-कानूनी सामग्री को हटाने के लिए 36 घंटे का समय होता था। अब इस समयसीमा को घटाकर केवल 3 घंटे कर दिया गया है। गंभीर मामलों में शिकायत निवारण (Grievance Redressal) को महज 2 घंटे के भीतर पूरा करना होगा।
-
अनिवार्य वाटरमार्क और लेबल (AI Labeling & Metadata): सभी डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एआई-जनरेटेड सिंथेटिक ऑडियो, वीडियो, फोटो और टेक्स्ट पर स्पष्ट रूप से दृश्यमान मार्क (Visible Label) और ट्रेस करने योग्य मेटाडेटा (Traceable Metadata) लगाना होगा, जिससे उपयोगकर्ता आसानी से पहचान सकें कि सामग्री असली है या एआई द्वारा निर्मित।
-
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग: पहचान की चोरी, वित्तीय फ्रॉड और डीपफेक पोर्नोग्राफी जैसे मामलों में प्लेटफॉर्म्स को जांच एजेंसियों और पुलिस के साथ तुरंत डेटा साझा करना होगा और तकनीकी उपाय (Technical Measures) तैनात करने होंगे।
सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलन
यह नया नियम नवंबर 2025 में जारी एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस (AI Governance Guidelines) का अगला विस्तार है।
समर्थकों और साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते डीपफेक मामलों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा और जवाबदेही तय करने के लिए यह एक अति-आवश्यक कदम था। हालांकि, कुछ आलोचकों और टेक विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि 3 घंटे की सख्त समयसीमा से प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और अत्यधिक सेंसरशिप के कारण अभिव्यक्ति की आजादी (Free Expression) प्रभावित हो सकती है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)