लोकसभा में पारित हुए यूपीआई मर्चेंट फीस और बैंक रिकॉर्ड्स से जुड़े दो अहम विधेयक; विपक्ष ने जताई चिंता

भारी हंगामे और विपक्ष के विरोध के बीच लोकसभा ने 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' और 'बैंकर्स बुक्स साक्ष्य विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। इस नए कानून के तहत यूपीआई (UPI) लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से कानूनी छूट की बाध्यता समाप्त हो गई है, हालांकि वित्त मंत्री ने साफ किया कि आम उपभोक्ताओं से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, एसपी (SP) या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों को बिना कोर्ट ऑर्डर के सीधे डिजिटल बैंक रिकॉर्ड मांगने का अधिकार मिल गया है।

Aug 07, 2026 - 10:35
0 6
लोकसभा में पारित हुए यूपीआई मर्चेंट फीस और बैंक रिकॉर्ड्स से जुड़े दो अहम विधेयक; विपक्ष ने जताई चिंता

नई दिल्ली: संसद के निचले सदन यानी लोकसभा (Lok Sabha) ने विपक्ष के कड़े विरोध और हंगामे के बीच बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों— 'कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' (Taxation and Other Laws Amendment Bill, 2026) और 'बैंकर्स बुक्स साक्ष्य विधेयक, 2026' (Bankers’ Books Evidence Bill, 2026) को ध्वनिमत से पारित कर दिया है।

इन दोनों कानूनों का सीधा असर डिजिटल भुगतान (Digital Payments) के इंफ्रास्ट्रक्चर और पुलिस द्वारा बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच प्रक्रिया पर पड़ेगा।

1. यूपीआई और डिजिटल भुगतान पर क्या बदला? (UPI Fees Update)

कराधान संशोधन विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और इलेक्ट्रॉनिक भुगतानों को मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से मिलने वाली शत-प्रतिशत कानूनी छूट की गारंटी की धारा को संशोधित कर दिया गया है।

  • वित्त मंत्री की सफाई: संसद में उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने स्पष्ट किया कि यूपीआई का उपयोग करने वाले आम उपभोक्ताओं (End Users) से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा

  • व्यापारियों पर असर: यदि भविष्य में कोई शुल्क या MDR लागू होता है, तो वह केवल मर्चेंट्स (व्यापारियों) पर ही लागू होगा। इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा में सुधार के लिए फंड जुटाना है।

2. पुलिस को बिना कोर्ट ऑर्डर बैंक रिकॉर्ड हासिल करने की शक्ति

'बैंकर्स बुक्स साक्ष्य विधेयक, 2026' ने दशकों पुराने साक्ष्य नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

  • नए अधिकार: अब पुलिस अधीक्षक (SP) या उससे उच्च स्तर के पुलिस अधिकारी किसी भी वित्तीय अपराध या डिजिटल फ्रॉड की जांच के लिए बिना कोर्ट का आदेश (Court Order) प्राप्त किए, सीधे बैंकों से संदिग्ध खातों के डिजिटल बैंक रिकॉर्ड्स (Digital Bank Records) हासिल कर सकेंगे।

  • उद्देश्य: सरकार का मानना है कि इससे साइबर क्राइम और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में जांच तेज होगी और अपराधियों तक तुरंत पहुंचा जा सकेगा।

विपक्ष ने जताया विरोध, निजता और जेब पर असर की जताई आशंका

विपक्षी दलों और कांग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध किया है:

  1. निजी डेटा और गोपनीयता (Privacy Risks): विपक्ष का तर्क है कि बिना अदालती हस्तक्षेप के सीधे बैंक डेटा तक पुलिस की पहुंच से नागरिकों के वित्तीय डेटा की गोपनीयता खतरे में पड़ सकती है।

  2. यूपीआई का फ्री मॉडल: विपक्षी नेताओं का कहना है कि मर्चेंट फीस की अनुमति देने से अंततः छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ेगी और फ्री यूपीआई मॉडल प्रभावित हो सकता है।

दूसरी ओर, सत्ता पक्ष के सांसदों का कहना है कि तेजी से बढ़ते यूपीआई लेनदेन के प्रबंधन और दीर्घकालिक स्थिरता के लिए ये बदलाव जरूरी थे।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0

Comments (0)

User