नेहा बोरा के बांग्लादेश वाले बयान पर भड़की भाजपा, सीजेपी की तिरंगा यात्रा पर भी जताई आपत्ति
हैदराबाद। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ इंडिया ब्लॉक, आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लगातार प्रदर्शन को लेकर भाजपा पहले से ही हमलावर है। इसी बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा के बयान 'बांग्लादेश ने क्रांति का रास्ता दिखाया है' और सीजेपी की प्रस्तावित तिरंगा यात्रा पर भी बयानों का दौर तेज हो गया है।
एन. रामचंद्र राव: 'राष्ट्रीय ध्वज की आड़ में अराजकता फैलाने की कोशिश'
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कहा, "ये तथाकथित नेता, सीजेपी के लोग, प्रशांत भूषण, ध्रुव राठी और नेहा बोरा, इन सभी के बयान साफ तौर पर भारत-विरोधी हैं। इनका मकसद देश में अराजकता और खून-खराबा फैलाना है। भले ही वे कहें कि वे राष्ट्रीय ध्वज लेकर चल रहे हैं, लेकिन विरोध-प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल करना, वह भी किसी नकारात्मक उद्देश्य के लिए, राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है।"
वीरेंद्र गौड़: 'तिरंगे को ढाल की तरह इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण'
भाजपा के प्रदेश महासचिव वीरेंद्र गौड़ ने भी सीजेपी के एक बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों से तिरंगे में लिपटकर आने को कहा है।
गौड़ ने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बयान से ऐसा लगता है कि वे तिरंगे को एक ढाल की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं। ठीक वैसे ही जैसे आतंकवादी किसी हमले के दौरान बच्चों और महिलाओं को ढाल बनाते हैं। आप नई दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के लिए तिरंगे का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह बहुत गलत संदेश देता है।"
वहीं, भाजपा प्रवक्ता महेश नामानी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की कार्यशैली में विरोधाभास है।
महेश नामानी: 'राहुल गांधी के रुख में भारी विरोधाभास
नामानी ने कहा, "हर किसी के पास दिमाग और दिल होता है, लेकिन राहुल गांधी के पास इनमें से कुछ भी नहीं है। क्योंकि एक तरफ वे सुप्रीम कोर्ट जाकर पीआईएल दायर करते हैं और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति को ही गलत बताते हैं। फिर यहां वे ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को भी गलत ठहराते हैं। लेकिन, जिन चुनावों को ज्ञानेश कुमार संपन्न कराते हैं, उनमें वे खुद हिस्सा भी लेते हैं। अगर आप कुछ कह ही रहे हैं, तो यह भी कहिए कि कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में सरकारें ज्ञानेश कुमार के आने के बाद ही बनीं।"
इनपुट : आईएएनएस
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