मेरठ से उठी कछुआ संरक्षण की क्रांति, सात जिलों तक पहुंचा अभियान

Jul 11, 2026 - 15:15
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मेरठ से उठी कछुआ संरक्षण की क्रांति, सात जिलों तक पहुंचा अभियान
मेरठ से उठी कछुआ संरक्षण की क्रांति
  • 118 कछुओ से शुरू हुआ सफर पांच हजार कछुओं तक पहुंचा
  •  प्रदेश सरकार की योजना और अधिकारियों की प्रेरणा से लोगों में आई जागरूकता

मेरठ। गंगा की स्वच्छता और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में मेरठ से शुरू हुई कछुआ संरक्षण की पहल योगी सरकार की बदौलत अब जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। हस्तिनापुर के मखदूमपुर गंगा घाट से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ अभियान प्रदेश सरकार के संसाधनों की बदौलत अब सात जनपदों तक पहुंच गया है। वन विभाग और विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस परियोजना में स्थानीय किसानों की भागीदारी इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।

कछुए नदियों की स्वच्छता में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रदेश सरकार के द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं। इस दिशा में कछुओं के महत्व को स्वीकार करते हुए प्रदेश सरकार ने कछुओं के संरक्षण पर जोर दिया। ऐसे में मखदूमपुर गंगा घाट पर 118 कछुओं के संरक्षण के साथ इस परियोजना की शुरुआत की गई थी। सरकार से मिले संसाधनों, वन विभाग और जिला गंगा समिति के अधिकारियों द्वारा चलाई गई जागरूकता की मुहिम से स्थानीय किसानों पर भी इसका प्रभाव पड़ा। जिला गंगा समिति ने किसानों को प्रशिक्षित करके गंगा मित्र का दर्जा प्रदान किया। दरअसल, गंगा तटों पर कछुए अपने अंडे नदी से 50 से 100 मीटर दूर तक देते हैं। ऐसे में जिन स्थानों पर कछुओं के अंडे अधिक संख्या में पाए जाते हैं, वहां किसानों ने स्वयं आगे आकर करीब 90 हेक्टेयर भूमि पर खेती नहीं की। इससे अंडों और नवजात कछुओं को सुरक्षित वातावरण मिला। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग पांच हजार कछुओं का संरक्षण किया जा चुका है।

चार जिलों में बनाई गई है हैचरी

गंगा समिति के जिला परियोजना अधिकारी तुषार गुप्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार से मिले सहयोग के कारण ही अब कछुओं का सर्वाइवल रेट 40 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया है। कछुओं के अंडों के संरक्षण और प्रजनन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा गंगा किनारे स्थित चार जिलों मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर में हैचरी स्थापित की गई हैं। शुरूआत में यह कछुओं के संरक्षण का यह कार्यक्रम केवल मेरठ जिले में 45 किलोमीटर क्षेत्र में ही लागू किया गया था। वर्तमान में यह कार्यक्रम मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, हापुड़, संभल, अमरोहा और बुलंदशहर जिलों में 225 किलोमीटर की दूरी तक चलाया जा रहा है।

गंगा को स्वच्छ रखते हैं कछुए

कछुए गंगा की प्राकृतिक सफाई में अहम भूमिका निभाते हैं। जिला वन अधिकारी वंदना फौगाट के अनुसार गंगा में छोड़े जाने वाले मांसाहारी कछुए अधजले शव, सड़े-गले मांस और अन्य जैविक अवशेषों को खाकर नदी की प्राकृतिक सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे जल की गुणवत्ता बेहतर होती है और नदी का पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित बना रहता है। उत्तर प्रदेश की यह परियोजना इसलिए अनूठी है क्योंकि इसमें स्थानीय लोगों को सीधे संरक्षण कार्य से जोड़ा गया है। पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते किसान गंगा मित्र बनकर कछुओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यही कारण है कि मेरठ से शुरू हुई यह छोटी पहल आज पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुकी है।

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