होर्मुज से निकले जहाज तो सरकार ने दी राहत, तेल-गैस पर लगा इमरजेंसी बैन हटा
- सरकार ने गैस पर लगे इमरजेंसी प्रतिबंधों को हटा दिया है
नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल-गैस के जहाजों की आवाजाही सुचारू होने के साथ ही भारत सरकार ने गैस को लेकर घरेलू स्तर पर लागू किए कई इमजेंसी प्रतिबंधों को वापस ले लिया है.
वेस्ट एशिया में युद्ध थम गया है और दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल-गैस जरूरतों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से फ्यूल लगे जहाजों की आवाजाही भी शुरू हो गई है. ये भारत ही नहीं दुनिया के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि होर्मुज बंद होने की वजह से पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन जैसे देशों ने बड़ा संकट झेला है, लेकिन अब ये टल गया है. अमेरिका-ईरान के बीच शांति होने और होर्मुज से जहाजों का निकलना शुरू होने के साथ ही भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. जो तेल-गैस से जुड़ी बड़ी राहत माना जा सकता है. दरअसल, सरकार ने संकट में लागू किए गए ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई नियमन आदेश’ के तहत जारी ज्यादातर प्रतिबंधों को वापस ले लिया है.
दुनिया की तेल जरूरतों को पूरा करने के लिए स्ट्रेटिजिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजों की आवाजाही की सिलसिला सुचारू होने के बाद ये प्रतिबंध करीब चार महीने के बाद हटाए गए हैं. जंग की शुरुआत होने के बाद होर्मुज बंद होने पर बीते 9 मार्च को घरेलू मार्केट में तेल-गैस की किल्लत से निपटने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जरूरी इमरजेंसी प्रतिबंध लागू किए थे. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इनके हटने के बाद अब घरेलू स्तर पर उत्पादित सभी प्राकृतिक गैस और आयातित एलएनजी को सरकार द्वारा तैयार नई प्राथमिकता लिस्ट के अनुसार बांटा जाएगा.
भारत अपनी तेल-गैस जरूरत का ज्यादातर हिस्सा आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है. युद्ध के दौरान इसके बंद होने से दोनों ही जरूरी ईंधन की किल्लत देखने को मिली थी. पेट्रोल डीजल से लेकर एलपीजी तक की कीमतों में इजाफा किया गया था. इसके साथ ही घरेलू स्तर पर जारी किल्लत कम करने के लिए सरकार ने जो कड़े नियम और प्रतिबंध लागू किए थे, उनके तहत पेट्रोकेमिकल प्लांटों और पावर स्टेशनों की सप्लाई में कटौती की गई थी, जबकि रिफाइनरीज की गैस खपत 65% पर लाई गई थी. इसके अलावा रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल रॉ मैटेरियल्स रोककर LPG उत्पादन के साथ ही थोक उपभोक्ताओं के लिए डीजल बिक्री पर बैन भी लगाया गया था, जिसे वापस लिया गया है.
सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल? : गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट ओपन होने के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट आई है. ब्रेंड क्रूड ऑयल का दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में घटकर 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है, जो युद्ध के दौरान गहराई ग्लोबल टेंशन के बीच 110-120 डॉलर पर ट्रेड करता नजर आया था. इस बीच तेल कंपनियों को होने वाले भारी नुकसान के चलते भारत में चार बार में करीब 7 रुपये के आसपास पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ था. अब होर्मुज से आवाजाही सुचारू होने और कच्चा तेल सस्ता होने से क्या पेट्रोल-डीजल के दाम भी घटेंगे, तो इसे लेकर इसी हफ्ते पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने तस्वीर साफ की थी. उन्होंने कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा.
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