परियों के देश में बबीता पांडेय की तलाश जारी... आखिर कहां गायब हुई एमबीए छात्रा?

बाइस दिन से एमबीए की रामनगर निवासी छात्रा 'बबीता पांडेय' की 'गुमशुदगी' पुलिस प्रशासन के लिए एक पहेली बनकर रह गई है। आसमां से लेकर पाताल तक सबसे बड़ा सर्च अभियान भी बबीता पांडेय की तलाश करते करते थक चुका है। इसके बावजूद कोई कामयाबी हाथ नहीं लग रही है।

Jun 20, 2026 - 14:43
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परियों के देश में बबीता पांडेय की तलाश जारी... आखिर कहां गायब हुई एमबीए छात्रा?
Babita Pandey

 Sanjay Knockout | उत्तराखंड ही नहीं अपितु देश के विभिन्न हिस्सों में कुल देवता और दैवीय शक्ति के रूप में कोई न कोई स्थान अपनी महत्ता रखता है। इनके प्रति मुख्य रूप से ग्रामीणों की आस्था भी जुड़ी रहती है। वाराणसी से होने के वास्ते हमारी भी अलौकिक शक्तियों के प्रति गहरी आस्था है। काशी की अपनी एक अलग परंपरा है और भगवान शिव के प्रति लोगों की अपार आस्था है। इस नगरी की खासियत है कि हर वर्गों के लोगो़ को समेट कर रखा है। फिर लौटते हैं उत्तराखंड की ओर। 

बाइस दिन से एमबीए की रामनगर निवासी छात्रा 'बबीता पांडेय' की 'गुमशुदगी' पुलिस प्रशासन के लिए एक पहेली बनकर रह गई है। आसमां से लेकर पाताल तक सबसे बड़ा सर्च अभियान भी बबीता पांडेय की तलाश करते करते थक चुका है। इसके बावजूद कोई कामयाबी हाथ नहीं लग रही है। उत्तराखंड के लोगों की भी दैवीय शक्ति के प्रति अटूट विश्वास है। यहां बताते चलें कि 29,मई की रात से ट्रैकिंग के लिए पर्वत की चोटियों पर गई बबीता पांडेय को लेकर घर वाले खोजते हुए हताश और परेशान हैं। वह अपने दो दोस्तों के साथ गई थी। दायड़ा बुग्याल कैंप में दोस्तों के साथ ठहरी थी। दोस्तों के शराब पीने पर उसका विवाद हो गया था।

वह नाराज होकर अंधेरी रात में तेज आवाज में एक कैंप के बाहर बैठकर मोबाइल फोन पर गाना सुनने लगी थी। मोबाइल पर बजते तेज आवाज में गानों से लोगों की नींद में खलल भी पड़ा। यहीं से अब कहानी में एक नया मोड़ आता है। इतने दिनों बाद भी बबीता के नहीं मिलने पर ग्रामीण मानने लगे हैं बबीता को परियां ले गईं होंगी। ऐसी प्राचीन मान्यता है कि उत्तराखंड में एक इलाका परियों वाले देश के रूप में विख्यात है। ऐसी मान्यता और कहावत है कि सदियों पहले टिहरी गढ़वाल के पर्वत के आसपास घिरे विशाल पहाड़ी क्षेत्र में एक स्थान खैंट पर्वत है।इस क्षेत्र में एक आशाराम रावत राजा होते थे। उनकी नौ बेटियां बहुत खूबसूरत थीं।

इन बेटियों को पहाड़ क्षेत्र ने काफी प्रभावित किया। एक रात में राजा की नौ बेटियां चलीं गईं और फिर नहीं लौटीं। ग्रामीणों का मानना है कि राजा की बेटियों मे दैवीय शक्ति थी। टिहरी गढ़वाल के इस क्षेत्र में खैंट पर्वत में जिला परिषद के बोर्ड पर अंकित है कि परियों के देश में आपका स्वागत है। यानि सरकार भी इस प्रचलित मान्यता पर भरोसा करती है। अब यह माना जाने लगा है कि बबीता को परियां ले गईं। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि परियों को शांति प्रिय माहौल और सादगी बहुत पसंद हैं। हो सकता है कि मोबाइल पर बजते तेज आवाज में गाना परियों को रास नहीं आया और बबीता को ले गईं। हालांकि, यह किस्से और कहानियां हैं। प्रशासन से उम्मीद है कि किसी की बेटी को सकुशल बरामद करने में सफल होगी।

नोट: संपादकीय पेज पर प्रकाशित किसी भी लेख से संपादक का सहमत होना आवश्यक नही है ये लेखक के अपने विचार है।

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