PRAYAGRAJ NEWS: स्कूल के पास बने रहे इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के निर्माण पर अंतरिम रोक, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
प्रयागराज: नगर निगम ने दावा किया कि वर्तमान में भी स्थानीय निवासियों द्वारा इस जमीन का उपयोग पारंपरिक शमशान घाट के रूप में किया जा रहा है. वहां खुले में शव जलाए जा रहे है. PRAYAGRAJ के नामी निजी स्कूल के पास इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के निर्माण पर Allahabad High Court ने अंतरिम रोक लगा दी है. ये इलेक्ट्रिक शवदाह गृह नगर निगम के द्वारा नैनी स्थित अरैल इलाके के पास बनाया जा रहा था, जिसके खिलाफ स्कूल ने याचिका दाखिल की थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसके निर्माण पर अंतरिम रोक लगा दी है.
कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है और प्रशासन को मौके का मुआयना कर एक सीलबंद रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता स्कूल की तरफ से सीनियर एडवोकेट तरुण अग्रवाल और अधिवक्ता प्रभाष पांडे ने पक्ष रखा.
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दी दलील
स्कूल की ओर से कहा गया कि जिस जमीन पर नगर निगम द्वारा इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का निर्माण किया जा रहा है, वह 'मास्टर प्लान 2031' के तहत P5 कैटेगरी में आती है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से 'रिवर बैंक डेवलपमेंट' के लिए आरक्षित किया गया है. नियमों के अनुसार इस क्षेत्र में नदी तट विकास योजना के अलावा किसी भी अन्य प्रकार का निर्माण पूरी तरह से वर्जित है.
इसके अलावा स्कूल पक्ष ने यह गंभीर चिंता भी जताई कि प्रस्तावित इलेक्ट्रिक शवदाह गृह स्कूल के मुख्य गेट से महज 200 मीटर के दायरे के अंदर बनाया जा रहा है. स्कूल के इतने करीब शवदाह गृह बनने से वहां पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य और स्कूल के पर्यावरण पर बेहद प्रतिकूल और हानिकारक प्रभाव पड़ेगा.
नगर निगम ने विरोध को बताया गलत
दूसरी ओर नगर निगम की तरफ से पेश अधिवक्ता विभू राय ने स्कूल की इन सभी दलीलों का कड़ा विरोध किया. नगर निगम की तरफ से दलील दी गई कि यह एक निजी भूमि है जिसे इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के निर्माण के लिए ही दान में दिया गया है ताकि इलाके में खुले में शवों को जलाने की प्रक्रिया को रोका जा सके.
नगर निगम ने दावा किया कि वर्तमान में भी स्थानीय निवासियों द्वारा इस जमीन का उपयोग पारंपरिक शमशान घाट के रूप में किया जा रहा है. वहां खुले में शव जलाए जा रहे है. खुले में शवों का जलना पर्यावरण और स्कूल के बच्चों की सेहत के लिए ज्यादा खतरनाक है.
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिविजन बेंच में इस याचिका पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने आदेश दिया कि निरीक्षण रिपोर्ट सामने आने तक प्रस्तावित स्थल पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह से जुड़ा कोई भी निर्माण कार्य अगले आदेश तक नहीं किया जाएगा. मामले में अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी.
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