Satluj Movie Row: दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ZEE5 पर बहाल करने के लिए पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक और दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म 'सतलुज' (Satluj) को ZEE5 से हटाए जाने के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में फिल्म को तुरंत बहाल करने की मांग करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Article 19) का उल्लंघन बताया गया है।

Jul 10, 2026 - 10:18
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Satluj Movie Row: दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ZEE5 पर बहाल करने के लिए पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर

चंडीगढ़: अभिनेता व गायक दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'सतलुज' (Satluj) को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 से अचानक हटाए जाने का विवाद अब देश की न्यायपालिका के दरवाजे पर पहुंच गया है। फिल्म को भारत में डिजिटल स्ट्रीमिंग के लिए दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।

यह याचिका पंजाब के रहने वाले और ZEE5 के सब्सक्राइबर श्रवण सिंह द्वारा संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), पंजाब सरकार, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और ZEE5 को प्रतिवादी (Respondents) बनाया गया है।

"बिना किसी कानूनी आदेश के फिल्म हटाना असंवैधानिक"

याचिकाकर्ता के वकील हाकम सिंह ने मीडिया को बताया कि यह याचिका व्यापक जनहित और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दायर की गई है। याचिका में दलील दी गई है:

"फिल्म 'सतलुज' को बिना किसी सार्वजनिक, वैधानिक, न्यायिक या आधिकारिक सरकारी आदेश के महज 'वर्तमान परिस्थितियों' का हवाला देकर प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को मिलने वाले 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' और 'सूचना पाने के अधिकार' का सीधा उल्लंघन है। इससे उन हजारों वैध सब्सक्राइबर्स के अधिकारों का भी हनन हुआ है, जिन्होंने इस कंटेंट को देखने के लिए भुगतान किया है।"

जो तथ्य पहले से सार्वजनिक रिकॉर्ड हैं, उन पर सेंसरशिप क्यों?

याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि फिल्म 'सतलुज' (जिसका पुराना नाम 'पंजाब '95' था) पंजाब के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता दिवंगत जसवंत सिंह खालरा के जीवन और 1980-90 के दशक में हुए कथित अवैध दाह संस्कारों को उजागर करने वाले उनके संघर्ष पर आधारित एक बायोपिक है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि फिल्म में दिखाए गए घटनाक्रम और तथ्य कोई गोपनीय या प्रतिबंधित जानकारी नहीं हैं। ये मामले पहले से ही भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court), विभिन्न अदालतों, सीबीआई (CBI) जांच और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सार्वजनिक रिकॉर्ड और फैसलों का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किए ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित फिल्म को अचानक रोक देना कानून के शासन के खिलाफ है।

क्या है पूरा मामला?

लगभग चार साल की लंबी सेंसरशिप और अदालती लड़ाई के बाद, फिल्म को बिना किसी एडवांस प्रमोशन के अचानक 3 जुलाई 2026 को 'सतलुज' नाम से ZEE5 पर रिलीज किया गया था। हालांकि, रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर ही 5 जुलाई 2026 को इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने 'सुरक्षा चिंताओं' और आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस) नियमों का हवाला देते हुए स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को इसे हटाने का निर्देश दिया था। इस प्रतिबंध के खिलाफ पंजाब में पहले ही शिरोमणि अकाली दल (SAD) और एसजीपीसी (SGPC) जैसी संस्थाओं ने विरोध जताते हुए पंजाब के हर गांव में फिल्म दिखाने का एलान किया है। अब हाई कोर्ट में इस जनहित याचिका के दाखिल होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि कोर्ट जल्द ही इस मामले पर सुनवाई कर अपना फैसला सुना सकता है।

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